चीन ने रोबोटिक्स में एक बार फिर शक्ति प्रदर्शन किया। दरअसल रविवार को हुई हाफ मैराथन में दर्जनों ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया और प्रोफेशनल एथलीट्स को पछाड़ते हुए ना सिर्फ रेस पूरी की बल्कि हाफ मैराथन का वर्ल्ड रिकॉर्ड तक तोड़ दिया। इसे एक्सपर्ट्स चीन की ताकत के तौर पर देख रहे हैं। एक समय पर खुद एलन मस्क भी कह चुके हैं कि रोबोट्स के मामले में टेस्ला को कोई टक्कर दे सकता है, तो वे चीन ही है। मैराथन के नतीजों के बाद यह बात सच साबित होती दिख रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल रोबोट्स ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए। जहां पिछले साल रोबोट्स लड़खड़ाते नजर आ रहे थे, वहीं इस साल उन्होंने इंसानों को ही पीछे छोड़ दिया। इस प्रदर्शन ने एलन मस्क की उस भविष्यवाणी पर भी मुहर लगा दी
AI और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन ही टेस्ला को टक्कर दे सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो रोबोट मैराथन जैसी रेस खुद पूरी कर पा रहे हैं वे भविष्य में फैक्ट्रियों और निर्माण के काम बहुत अच्छी तरह से पूरे कर पाएंगे।
पिछले साल की रेस में विजेता रोबोट ने 2 घंटे 40 मिनट में रेस पूरी की थी। इस साल Honor ब्रांड के रोबोट ने मात्र 50 मिनट 26 सेकंड में फिनिश लाइन पार कर ली। इस टाइम के साथ इस रोबोट ने इंसानों को भी चुनौती दी है। गौर करने वाली बात है कि यह युगांडा के जेकब किप्लिमो द्वारा बनाए गए 57 मिनट 31 सेकंड के इंसानी वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी 7 मिनट कम है। इस तरह से देखा जाए, तो Honor के इस रोबोट ने हाफ मैराथन के वर्ल्ड रिकॉर्ड को 7 मिनट के फासले से तोड़ दिया है। इसे रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है, जो कि दिखाता है
अब रोबोट्स सिर्फ धीरे-धीरे चलने वाले खिलौने नहीं हैं बल्कि सुपरह्यूमन रफ्तार वाले एथलीट बन चुके हैं।

इस साल रोबोट्स में जो सबसे बड़ी खूबी देखने को मिली, वह थी सेल्फ-नेविगेशन।
पिछले साल की तरह इस बार रोबोट्स रिमोट से नहीं बल्कि खुद के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस दिमाग से 21 किलोमीटर का रास्ता तय कर रहे थे। इसके अलावा रोबोट्स के रेस में ठंडा रखने के लिए लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया था। रेस का मकसद साफ तौर पर रोबोट्स की मजबूती और सुधार को परखना था। पिछले साल टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने खुद माना था कि ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट में सिर्फ चीन ही है, जो उन्हें टक्कर दे सकता है। मस्क का मानना था कि चीन मैन्युफैक्चरिंग और एआई मॉडल बनाने में माहिर है। इस रेस ने उन्हें काफी हद तक सही साबित किया है।





