fourth pillars news update 20.10.2026
अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय और अहंकार पर मर्यादा की विजय यही है विजयादशमी का शाश्वत संदेश। भारतीय संस्कृति में कुछ पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन के गहरे दर्शन हैं। विजयदशमी हमें याद दिलाता है कि शक्ति से अधिक महत्त्व उसके सदुपयोग का है और ज्ञान से भी अधिक महत्त्व विवेक का है। अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय और अहंकार पर मर्यादा की विजय यही है विजयादशमी का शाश्वत संदेश। भारतीय संस्कृति में कुछ पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन के गहरे दर्शन हैं। विजयदशमी हमें याद दिलाता है कि शक्ति से अधिक महत्त्व उसके सदुपयोग का है और ज्ञान से भी अधिक महत्त्व विवेक का है।

युग में इसी सत्य और धर्म की प्रतिष्ठा के लिए प्रभु श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था।
रावण प्रकांड विद्वान, महाशक्तिशाली और महान शिवभक्त था, किंतु उसका अहंकार और अधर्म उसके समस्त गुणों पर भारी पड़ गया। यही विजयदशमी का सबसे बडा संदेश है। जब–जब अंहकार विवेक पर हावी हो जाता है, तब पतन निश्चित है। लेकिन क्या रावण का अंत केवल एक युग की घटना है या यह हमें आज भी अपने भीतर झाँकने का अवसर देता है। आज भी हमारे भीतर क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, छल और अहंकार के रूप में अनेक बुराइयाँ जीवित हैं। ऐसे में, रावण के पुतले का दहन तभी सार्थक होगा, जब हम अपने विचारों और आचरण में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएँगे। नवरात्रि उत्सव के नौवें दिन, महानवमी को कर्नाटक में आयुध पूजा के रूप में मनाया जाता है।इस मौके पर वाहनों, कारखानों और कार्यलयों के परिसरों की साफ–सफाई की जाती है और वहां इस्तेमाल होने वाली मशीनों व औजारों की पूजा की जाती है। मैसूरू पैलेस में शाही परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य द्वारा शस्त्रागार पालकियों और अन्य शाही प्रतीकों की पूजा की जाती है। 10 दिनों तक चलने वाला भव्य दशहरा उत्सव विजयदशमी के साथ संपन्न होता है ।




