केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल का दौरा किया.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल में भर्ती कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के दौरान घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ बैठक की. दरअसल, सोमवार को सीजेपी के ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कई लोगों को इलाज के लिए आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा भी आरएमएल अस्पताल पहुंचे हैं.


वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वह और बेहतर प्रयास थे.
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया गया है.


एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयरपर्सन आकार पटेल ने कहा, “जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्ट दिखाती हैं कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है.” “ख़बरों के अनुसार, पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया और उन्हें संसद तक पहुँचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए. अधिकारियों ने मेट्रो सेवाएँ और मोबाइल इंटरनेट भी बंद कर दिए, जिससे शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने के अधिकार पर और रोक लगी.”

“अधिकारियों की भूमिका शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सुरक्षा करना और उन्हें आसान बनाना है, न कि उन्हें दबाना. शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी का अधिकार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और भारतीय संविधान में मान्यता प्राप्त है.”


एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के हिसाब से सही, ज़रूरी और सीमित कार्रवाई की.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, “हम दिल्ली पुलिस से अपील करते हैं कि वह धैर्य रखें और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ ग़लत तरीक़े से बल का इस्तेमाल तुरंत बंद करें. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिसकर्मियों पर डंडे चलाने, आंसू गैस छोड़ने और पत्थर फेंकने जैसे आरोपों की जल्द, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जाए.”


इससे पहले ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी चिंता इस पर जताई थी. संगठन ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है.

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