FOURTHPILLARSNEWS : 4TH पिलर्स की टीम को ओर से महानायक को जन्म दिन और उत्तम स्वास्थ्य की हार्दिक शुभकामनायें.
आज हिंदी सिनेमा के शहंशाह अमिताभ बच्चन जी का जन्म दिन है …आज वो 83 बरस के हो गए लेकिन अभी भी अपनी ऊर्जा समय की पाबंदगी और पेशेवर अनुशासन के लिए नयी पीढ़ी को मात देते हैं आज वो सफलता के शिखर पर विराजमान हैं और भारत के हर जलसाघर में सिने प्रेमियों ने अमित जी का जलवा देखा है और ये महसूस किया है कि अमित जी ने अपने नाम अमिताभ को सार्थक किया है , अमित जी की आभा अमिट है लेकिन सफलता और प्रसिद्धि की इस अमिट आभा को हासिल करने के लिए अमित जी को भी बहुत संघर्ष करना पड़ा है।
अमिताभ बच्चन की आँखों के एक्सप्रेशन से प्रभावित होकर प्रकाश मेहरा जी ने तय कर लिया कि उनकी फ़िल्म ज़ंजीर के नायक अमिताभ बच्चन होंगे ।

अमिताभ बच्चन जी के करियर की एक बेहद अहम् फ़िल्म है ज़ंजीर जिसके निर्माता निर्देशक थे प्रकाश मेहरा …इस फ़िल्म ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए थे. ज़ंजीर से पहले अमिताभ बच्चन 18 फ़िल्मों में काम कर चुके थे और सफलता उनसे कोसों दूर थी लेकिन प्रकाश मेहरा की ज़ंजीर से अमिताभ बच्चन के करियर में निराशा और असफलता की ज़ंजीरें भी टूटीं और ज़ंजीरें टूटीं हिंदी सिनेमा के घिसे-पिटे अंदाज़ की
फ़िल्म वितरक इस फ़िल्म को लेने से हिचक रहे थे क्यों कि इस फ़िल्म के नायक के रूप में अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा में कोई ख़ास जगह और पहचान नहीं बना पाए थे
हालांकि ज़ंजीर की नायिका जया भादुड़ी स्थापित हो चुकी थीं , फ़िल्म के अन्य प्रमुख कलाकार थे प्राण और अजित जिनसे दर्शक भली भाँती परिचित थे …ये फ़िल्म 11 मई 1973 को रिलीज़ हुई थी और 3 जून 1973 को फ़िल्म की नायिका जया भादुड़ी और अमिताभ बच्चन विवाह की ज़ंजीर में बंधे…बहरहाल हम बात कर रहे थे अमिताभ बच्चन जी के करियर को तूफ़ानी अंदाज़ में कामयाबी और शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचाने वाली फ़िल्म ज़ंजीर की

प्रकाश मेहरा ने पंडित मुखराम शर्मा से एक कहानी के अधिकार लिए जो अभिनेता धर्मेन्द्र को पसंद आ गयी उन्होंने उसे प्रकाश मेहरा से मांग लिया और बदले में उन्हें एक कहानी देते हुए कहा ये कहानी इंस्पेक्टर और पठान की कहानी है जो बाद में ज़ंजीर के नाम से बनी ज़ंजीर के निर्माण के दौरान कई पेंच आये और सबसे एहम मुद्दा था नायक का चयन….इसके लिए पहले धर्मेन्द्र जी को लेने के बारे में सोचा गया । लेकिन धर्मेन्द्र उन दिनों अपनी फ़िल्म प्रतिज्ञा में व्यस्त थे उन्होंने प्रकाश जी को 6 महीने इंतज़ार करने के लिए कहा जो प्रकाश जी के अनुसार असंभव था।
खैर अभिनेता प्राण के बेटे सुनील सिकंद ने प्रकाश मेहरा जी से कहा कि , बांद्रा के गेयटी-गैलेक्सी में फ़िल्म “बॉम्बे टू गोआ” लगी है आप एक बार ये फ़िल्म देख लो , सुनील सिकंद के इस सुझाव को मानकर प्रकाश मेहरा लेखक ,शायर और गीतकार जावेद अख्तर के साथ ये फ़िल्म देखने गए …इस फ़िल्म में एक दृश्य है जिसमें अमिताभ बच्चन एक सैंडविच खाते हुए बाहर आते हैं जहाँ उनकी लड़ाई अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के साथ होती है इस दृश्य में अमिताभ बच्चन की आँखों के एक्सप्रेशन से प्रभावित होकर प्रकाश मेहरा जी ने तय कर लिया कि उनकी फ़िल्म ज़ंजीर के नायक अमिताभ बच्चन होंगे ।

हालाँकि फ़िल्म के लेखक सलीम-जावेद चाहते थे कि ज़ंजीर की स्टारकास्ट टॉप क्लास हो यानी और उस दौर के टॉप क्लास स्टार थे धर्मेन्द्र , देवानंद और राजकुमार ….धर्मेन्द्र चूँकि अपनी फ़िल्म प्रतिज्ञा में व्यस्त थे और तारीखों की समस्या थी तो प्रकाश मेहरा देव साहब से मिले वो भी तीन चार बार फिर प्राण साहब के घर खाने पर मिले इस दौरान अभिनेत्री वहीदा रहमान भी थीं लेकिन देव साहब इस बात आर जोर देते रहे कि फ़िल्म में उन पर तीन-चार गाने ज़रूर होने चाहिए …इस पर प्रकाश मेहरा जी ने देव साहब को समझाते हुए कहा कि , क्या आपने फ़िल्म में किसी पुलिस ऑफिसर को गाना गाते देखा है ? देव साहब ने पलटकर सवाल किया कि , यार क्या तुम कोई आर्ट फ़िल्म बना रहे हो जो ऐसी वास्तविकता दिखाना चाहते हो ?

इस पर प्रकाश मेहरा जी ने जवाब दिया देव साहब आर्ट फ़िल्म से आपका क्या मतलब है ? मेरी ये फ़िल्म पूरी तरह से एक कमर्शियल फ़िल्म होगी और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि इस फ़िल्म में एक रोमांटिक गाना भी होगा लेकिन वो फ़िल्म में न तो हीरो गायेगा और न ही हिरोइन गाएगी …देव साहब ने कहा तुममे वाकयी बहुत आत्म विश्वास है , मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे साथ हैं..तो इस तरह देव साहब का नाम भी रद्द हो गया ..अब प्रकाश मेहरा मिले राजकुमार जी से वो कहानी सुनकर बोले अरे यार ये तो मेरी ही कहानी है मैं तो माहिम पुलिस चौकी में सब इन्स्पेक्टर के रूप में तैनात था ।
मेरी एक शर्त है ये फ़िल्म आपको मद्रास में पूरी करनी पड़ेगी क्यों की उन दिनों अभिनेता राजकुमार मद्रास की तीन फ़िल्मों में काम कर रहे थे और उनके साथ अभिनेत्री मुमताज़ भी काम कर रही थीं … प्रकाश मेहरा ने कहा राजकुमार जी फ़िल्म के कथानक की पृष्ठभूमि और क्राउड लोकल है जो मद्रास में संभव नहीं इस तरह राजकुमार जी भी इस फ़िल्म का हिस्सा नहीं बन पाए …बहरहाल इसी फ़िल्म ज़ंजीर से जन्म हुआ हिंदी सिनेमा के उस एंग्रीयंगमैन का जिसे बाद में नवाज़ा गया सदी के महानायक के रूप में.




