अखबार बांटने वाले पिता का बेटा बना अफसर, राजकुमार ने तीसरे प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

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बोकारो के छोटे से परिवार से आने वाले राजकुमार महतो ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 557वीं रैंक हासिल कर अपने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश की.

राजकुमार महतो ने सीमित साधनों, गरीबी और कठिन हालात के बीच रहकर असाधारण सफलता हासिल की है.

जब किसी छोटे शहर के साधारण परिवार का बेटा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करता है, तो वह सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं बदलता, बल्कि लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की एक नई राह खोल देता है. ऐसी ही प्रेरक कहानी है राजकुमार महतो की, जिन्होंने सीमित साधनों, गरीबी और कठिन हालात के बीच रहकर असाधारण सफलता हासिल की है.

झारखंड के बोकारो जिले के चास जोधाडीह मोड़ इलाके में रहने वाले राजकुमार महतो ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 557वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले और राज्य का नाम रोशन किया है. राजकुमार के पिता रामपत महतो अखबार बांटने का काम करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन पढ़ाई के लिए उन्होंने अपने बेटे का हौसला कभी कम नहीं होने दिया.

राजकुमार का बचपन साधारण रहा. घर की जरूरतें पूरी करने में परिवार को रोज संघर्ष करना पड़ता था. लेकिन पढ़ाई के प्रति राजकुमार का लगाव शुरू से ही गहरा था. उन्होंने ठान लिया था कि हालात चाहे जैसे भी हों, वह मेहनत के रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे. यही सोच आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

दिल्ली विश्वविद्यालय से की पढ़ाई

राजकुमार महतो ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रामजस कॉलेज से फिजिक्स ऑनर्स में पढ़ाई की. दिल्ली जैसे बड़े शहर में पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को स्वीकार किया. कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी और साथ ही दिल्ली में कोचिंग भी ली.

कोविड ने बदली राह, लेकिन नहीं बदला लक्ष्य

तभी देश में कोविड महामारी आ गई. हालात ऐसे बने कि राजकुमार को दिल्ली छोड़कर वापस अपने गांव चास लौटना पड़ा. यह उनके लिए बड़ा झटका था, क्योंकि शहर की पढ़ाई और सुविधाएं अचानक छूट गई थीं. लेकिन उन्होंने इस मुश्किल को भी अवसर में बदल लिया. चास लौटने के बाद उन्होंने बाहर जाने का फैसला नहीं किया और वहीं रहकर अपनी तैयारी जारी रखी.

बिना कोचिंग के जारी रखी तैयारी

गांव में रहते हुए राजकुमार ने बिना किसी कोचिंग के अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाई. उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल नोट्स और किताबों की मदद से तैयारी की. उनका मानना है कि सही योजना और समय का सही उपयोग हो, तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ टाइम मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया.

पढ़ाई के साथ हासिल की और सफलताएं

UPSC की तैयारी के दौरान ही राजकुमार ने इग्नू से मास्टर्स की पढ़ाई भी पूरी की. इतना ही नहीं, उन्होंने UGC NET परीक्षा भी पास की. यह दिखाता है कि उन्होंने खुद को एक ही लक्ष्य तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लगातार सीखते रहने की आदत बनाई.

तीन प्रयास, हर बार नई सीख

राजकुमार महतो ने यू पी एस सी परीक्षा में कुल तीन प्रयास किए. पहले प्रयास में उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. यह समय उनके लिए निराशाजनक रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. दूसरे प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आ सका. इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास बना रहा. तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीख ली, रणनीति बदली और और ज्यादा मेहनत की. आखिरकार वही दिन आया, जब उनका नाम अंतिम लिस्ट में शामिल हुआ और उन्होंने 557वीं रैंक हासिल कर ली. 

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