Fourth pillars Desk 03.010.2026 रायपुर छत्तीसगढ़ मनोरंजन की लोकप्रिय सेवा विविध भारती ( 3 अक्तूबर विविध भारती की सालगिरह पर विशेष लेख )
भारतीय उप महाद्वीप के बेहद लोकप्रिय रेडिओ चैनल में शुमार होता है आकाशवाणी की लोकप्रिय सेवा विविध भारती का जो 3 अक्टूबर 1957 को अस्तित्व में आयी | इसकी परिकल्पना को जिन हस्तियों ने साकार किया उनके नाम हैं तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री डॉ.पी.वी. केसकर , प्रसारण मंत्रालय के तत्कालीन सचिव श्री पी .एम.लाट , आकाशवाणी के तत्कालीन महानिदेशक श्री जगदीश चन्द्र माथुर और प्रसिद्द साहित्यकार और फिल्म गीतकार पंडित नरेंद्र शर्मा .
विविध भारती का आरंभिक स्वरुप “ऑल इंडिया वैरायटी प्रोग्राम” यानी अखिल भारतीय विविध विविध रंगी कार्यक्रम का था |
इस सेवा को विविध भारती नाम दिया सुप्रसिद्ध कला और साहित्य मनीषी पंडित नरेंद्र शर्मा ने जो हिंदी सिनेमा के बेहद लोकप्रिय और सफल गीतकार के रूप में भी स्थापित थे | वो 1957 के अक्टूबर माह की तीसरी तारिख़ थी जब भारत में रेडिओ प्रसारण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा जा रहा था | समय था सुबह 10 बजकर 13 मिनट | शॉर्ट वेव 19 और शॉर्ट वेव 25 मीटर बैंड पर आकाशवाणी के “पंचरंगी कार्यक्रम” विविध भारती का जन्म हुआ | कालांतर में इस सेवा के साथ आकाशवाणी की मनोरंजन सेवा और राष्ट्रीय सेवा जैसे विशेषण भी जोड़े गए |

3 अक्टूबर 1957 को परिचयात्मक उद्घोषणा “ ये विविध भारती है आकाशवाणी का पंचरंगी कार्यक्रम “ से पहले राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी की पंक्तियों ने आकाशवाणी करते हुए शुभकामना के फूल बरसाए थे | राष्ट्रकवि की वो यादगार पंक्तियाँ थीं “ मानस भवन में आर्य जन जिनकी उतारें आरती
भगवान् भारतवर्ष में गूंजे हमारी भारती “उस दौर में आकाशवाणी के अनगिनत केंद्र होते हुए भी विविध भारती सेवा शुरू करने की आवश्यकता को रखांकित करते हुए विविध भारती के तत्कालीन चीफ़ प्रोड्यूसर पंडित नरेंद्र शर्मा ने कहा था “ हमारे इतने बड़े संस्थान में जिसको कि आकाशवाणी कहा जाता था अनेक ऐसे कार्यक्रम थे कि , जो ज़्यादातर निष्णांत बुद्धिजीवी श्रोताओं के लिए थे |किन्तु अधिक संख्या में वो अखिल भारतीय श्रोता है जिसे हम और किसी बहुत अच्छे शब्द के अभाव में कहेंगे ले-लिसनर यानी सामान्य श्रोता | और एक सामान्य श्रोता की रेडिओ प्रसारण से जो अपेक्षाएं या आवश्यकताएं थीं उनमें विविधता भी होनी चाहिए और भारतीयता भी तो इन दो आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए “ विविध भारती” नाम उपयुक्त सिद्ध हुआ और इस प्रकार शुभारम्भ हुआ “विविध भारती सेवा” का

तब के बॉम्बे और आज के मुम्बई और मद्रास यानी आज के चेन्नई केंद्र के लिए शॉर्ट वेव पर एक साथ प्रसारण होता था | मुम्बई से प्रसारण उत्तर और पश्चिम के भारत के श्रोताओं तक पहुँचता था जबकि मद्रास यानी चेन्नई केंद्र से पूर्व और दक्षिण के श्रोताओं तक | तब के मद्रास केंद्र पर विविध भारती की पहली उद्घोषणा की तेलुगु भाषा की उद्घोषिका राजलक्ष्मी जी ने | असल में उस दिन जिस उद्घोषक को ये उद्घोषणा करनी थी वो समय पर उपस्थित नहीं हो पाया था | राजलक्ष्मी जी की उद्घोषणा के बाद “कर्नाटक” वाद्य संगीत का प्रसारण हुआ | राजलक्ष्मी जी इसके बाद मद्रास केंद्र पर 7 बरस तक विविध भारती की उद्घोषिका रहीं |

हवामहल की परिचय धुन की कहानी भी दिलचस्प है
विविध भारती के मुम्बई केंद्र से “पहली उद्घोषणा” की थी “शील वर्मा” ने | विविध भारती पर पहले दिन से ही “पत्रावली” का प्रसारण शुरू हो गया था | चूंकि शुरू के कुछ दिन श्रोताओं के पत्रों का आना संभव ही नहीं था इसलिए पूरे एक सप्ताह पत्रावली में श्रोताओं के नाम विविध भारती का पत्र प्रसारित हुआ | विविध भारती पर पहला प्रसार गीत मन्ना डे के स्वर में प्रसारित हुआ जिसके बोल थे “नाच रे मयूरा” गीतकार थे पंडित नरेंद्र शर्मा और संगीतकार थे अनिल बिस्वास |
विविध भारती पर हवा महल का प्रसारण 20 अक्टूबर 1957 से आरम्भ हुआ |इस दिन जो पहला हवामहल प्रसारित हुआ था उसके लिए विविध भारती के चीफ़ प्रोड्यूसर पंडित नरेंद्र शर्मा ने एक विशेष संगीत नाटिका लिखी थी “महारास” |
पहली परिचय धुन कार्यक्रम अधिकारी पंडित सत्येन्द्र शरत ने एक गुजराती गीत के आरंभिक अंश यानी प्रील्यूड से ली थी ,दो तीन वर्ष तक वही परिचय धुन प्रयोग में लाई गयी फिर सन 1960 में पहली परिचय धुन के आधार पर एक नयी धुन तैयार करवाई गयी जो आज तक प्रयोग में लाई जा रही है | विविध भारती के अन्य कार्यक्रमों के लिए परिचय धुनें तैयार करने की ज़िम्मेदारी निभायी अनिल बिस्वास , टी.के.जयराम अय्यर , एमिनी शंकर शास्त्री , सूर्यकुमार पाल , कृष्णा भट्टाचार्य और नीतू मजूमदार जैसे उस दौर के बेहद लोकप्रिय और गुणी संगीतकारों ने |
विविध भारती पर कार्यक्रमों के निर्माण और प्रस्तुति का दायित्व निभाया मधुप शर्मा , भृंग तुपकरी ,शौक़त कैफ़ी ( शायर कैफ़ी आज़मी साहब की पत्नी ) रिफ़त सरोश और सत्येन्द्र शरत जैसी प्रतिभाओं ने | शौक़त कैफ़ी मनचाहे गीत कार्यक्रम को पेश करती थीं और इस प्रोग्राम की शुरुआत से ही इससे जुड़ी थीं | सत्येन्द्र शरत पर हवामहल की ज़िम्मेदारी थी और रिफ़त सरोश पेश करते थे गीतों और गज़लों का प्रोग्राम “गजरा” उन दिनों विविध भारती पर प्रसारित होने वाले अन्य रोचक कार्यक्रम थे : भक्ति संगीत का कार्यक्रम “वन्दनवार” ,”लोक संगीत” , “गीतों भरी कहानी” , “उदयगान” , “इन्द्रधनुष” ,शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम : “राग-रंग” , सुगम संगीत का कार्यक्रम : “मंजूषा” और फौजी भाइयों के लिए पेश किया जाने वाला कार्यक्रम : “जयमाला”
फौजी भाइयों के लिए पहला “विशेष जयमाला कार्यक्रम” पेश किया था अभिनेत्री नर्गिस ने | विविध भारती पर इस बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम को पेश करने वाली अनगिनत फ़िल्मी हस्तियों में से कुछ के नाम हैं : मीना कुमारी , प्रदीप , अशोक कुमार , देवानंद , सोहराब मोदी , राजकुमार , धर्मेन्द्र , मदन मोहन , लता मंगेशकर , आशा भोसले , शंकर-जयकिशन ,ओ.पी.नय्यर ,नौशाद ,सचिनदेव बर्मन , गुलज़ार , शक्ति सामंत , राजिंदर कृशन और इन्दीवर |

जीवंत प्रसारण की शुरुआत से पहले देश के विभिन्न केन्द्रों से एक ही समय पर , एक साथ कार्यक्रम प्रसारित हो सकें इसके लिए फिल्म प्रोड्यूसर्स की विशेष अनुमति से केवल एक बार प्रसारण हेतु फ़िल्मी गीतों को टेप पर रिकॉर्ड कर प्रसारित करने की सुविधा केवल विविध भारती को मिली थी | विविध भारती की टीम ने सन 1957 में जहाँ अपने कार्यक्रमों की रिकॉर्डिग शुरू की थी वहां अब दूरदर्शन मुम्बई की इमारत है | वरली के इस स्थान पर एक बैरकनुमा कमरे में विविध भारती के कार्यक्रम रिकॉर्ड होते थे | ये जगह न तो साउंड प्रूफ़ थी और न ही वातानुकूलित बावजूद इसके श्रोताओं तक बेहतरीन कार्यक्रम पहुंचाने का जोश कम नहीं हुआ

अतीत में जो कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय थे उनमें से कुछ के नाम हैं : चित्र ध्वनि , चित्रशाला , अनुरंजनी , चौबारा , रंग-तरंग ,साज़ और आवाज़ आदि
सन 1958 में विविध भारती को मुम्बई से दिल्ली स्थित नए स्टूडियोज़ में स्थानांतरित कर दिया गया |दिल्ली स्थानांतरित होते ही विविध भारती पर रोज़ाना डेढ़ घंटे तक “कर्नाटक संगीत सभा” का प्रसारण आरंभ किया गया जिसके अंतर्गत तमिल , तेलुगु , कन्नड़ और मलयालम भाषा की सुगम , लोक-संगीत , शास्त्रीय-संगीत और फ़िल्मी रचनाएँ प्रसारित की जाती थीं | उन दिनों विविध भारती से प्रसार गीत , नाटिकाएं , वाद्य संगीत और फ़रमाइश पर फ़िल्मी गीत भी प्रसारित किये जाते थे | 1 नवम्बर 1967 को शुरुआत हुई विविध भारती की “विज्ञापन प्रसारण सेवा” की जिसकी पहली उद्घोषणा की थी शील कुमार ने
सन 1972 में विविध भारती का मुख्यालय एक बार फिर दिल्ली से मुम्बई स्थानांतरित कर दिया गया | 1992 तक विज्ञापन प्रसारण सेवा की “25 वीं सालगिरह” तक आते-आते 30 केन्द्रों से विज्ञापन आधारित कार्यक्रम प्रसारित होने लगे जिनमें स्पॉट्स और जिंगल्स के अलावा प्रायोजित कार्यक्रम भी शामिल थे |
3 मई 1970 की दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर “विज्ञापन प्रसारण सेवा” पर पहला प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित हुआ “सेरीडॉन के साथी” रोश प्रोडक्ट्स लिमिटेड के इस कार्यक्रम में उस दौर के मशहूर फ़िल्मी सितारे अपने साथी कलाकारों के बारे में दिलचस्प बातें बताया करते थे | इस कार्यक्रम पहली मेहमान थीं अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल | इस कार्यक्रम के कम्पीअर और निर्माता थे श्री अमीन सायानी | उसी दिन दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर सुरु हुआ कोहिनूर मिल्स का कार्यक्रम “कोहिनूर गीत गुंजार” इसे प्रस्तुत करते थे पंडित विनोद शर्मा |

लम्बे समय तक चलने वाला एक और लोकप्रिय कार्यक्रम रहा मनोहर महाजन द्वारा पेश किया जाने वाला “सेंटोजन की महफ़िल” इस कार्यक्रम को पेश करने वाली टीम के अन्य सदस्य थे सईदुल हसन ,अजय कश्मीरी , मोना अल्वी , रमेश तिवारी , मुज़फ्फ़र क़ादरी , विजय वर्मा और वी.सूरी | इस कार्यक्रम में रामरिख मनहर , टुनटुन और मोहन चोटी जैसे लोकप्रिय कलाकार आमंत्रित किये जाते थे | कुसुम कपूर द्वारा निर्मित कार्यक्रम “क़िस्सा तोता-मैना” ( प्रायोजक : एल.आय.सी ), “एवररेडी के हमसफ़र” और “कृष्णायन” ( प्रायोजक : जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ) ,कैलाश गोयल द्वारा निर्मित “अपनी कहानी-अपनी ज़बानी” भी उस दौर के लोकप्रिय कार्यक्रम थे |
विज्ञापन प्रसारण सेवा पर बजने वाला किसी फिल्म का पहला रेडिओ स्पॉट “कब-क्यूँ-कहाँ” फिल्म का था जिसे पेश करते थे विजय बहल | नामचीन फ़िल्म अभिनेत्री मधुबाला जी की छोटी बहन मधुर भूषण ( ज़ाहिदा ) और उनके पति बृज भूषण मेहरू ( विज्ञापन और डॉक्युमेंट्री फिल्मों के नामचीन वॉइस आर्टिस्ट और संगीतकार ) द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया जाने वाला कार्यक्रम “चेरी ब्लॉसम नोक झोंक” भी श्रोताओं के बीच बहुत ही लोकप्रिय था | उस दौर में विज्ञापन प्रसारण सेवा के कुछ अन्य लोकप्रिय प्रायोजित कार्यक्रम थे : फ़ेमिना टेक्स्टाइल्स का “जॉनी वॉकर के जवाब” , खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा प्रायोजित “ आज़ादी की अमर कहानी”,मफ़तलाल मिल्स द्वारा प्रायोजित “अमृत वाणी” , हिन्दुस्तान कोको लि. का “बोर्नविटा क्विज़ कॉन्टेस्ट” , अमीन सायानी जी की पत्नी द्वारा प्रस्तुत “मोदी संगीत कहानी” , अमीन सायानी द्वारा नेटवर्क ब्रॉडकास्ट का पहला कार्यक्रम “सिबाका गीतमाला” इसके अलावा “वीडियोकॉन फिल्मधारा” ,सूचना और प्रसारण मंत्रालय का “आओ हाथ बढ़ाएं” एवं “नया सवेरा”, “लक्स सितारों की सरगम” , “सेल्स टैक्स कंसल्टेंट” , “मानवता के सेवक” , “सवाल आपके जवाब सितारों के” , शिशुओं के स्वास्थ्य पर केन्द्रित कार्यक्रम “फेरेक्स बॉमी बेबी टाईम” , राग-रागिनियों पर केन्द्रित प्रसिद्द कलाकरों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम “राग-अनुराग” पाश्चात्य संगीत आधारित “फ़ॉरच्यून रेडिओ लिस्नर्स क्लब” ,बी,के,अन्ताक्षरी और पंडित नरेंद्र शर्मा द्वारा पेश किया जाने वाला प्रसिद्द कार्यक्रम “इन्स्पेक्टर ईगल” .
सन 1996 में विविध भारती सेवा की तत्कालीन निदेशक विजय लक्ष्मी सिन्हा ने विविध भारती पर सप्ताह के सातों दिनों के लिए पिटारा के अंतर्गत एक घंटे की अवधि के 7 कार्यक्रम शुरू किये जिनमें शामिल था भारत का पहला इंटरैक्टिव फ़ोन-इन-प्रोग्राम हैलो फ़रमाइश , सेल्युलॉईड के सितारे ,सरगम के सितारे , हमारे मेहमान , चूल्हा-चौका, बाय स्कोप की बातें और सेहतनामा जैसे कार्यक्रम जिनमें फ़ोन-इन-प्रोग्राम हैलो फ़रमाइश ने लोकप्रियता के शिखर को छुआ | विजय लक्ष्मी सिन्हा जी के दौर में ही विविध भारती पर त्रिवेणी कार्यक्रम की शुरुआत हुई |
विविध भारती पर विजय लक्ष्मी सिन्हा की पहल पर ही राष्ट्रीय फिल्म पत्रिका चित्र भारती का निर्माण शुरू हुआ | विविध भारती पर कारगिल युद्ध के दौरान तत्कालीन केंद्र निदेशक अशोक शर्मा के निर्देश पर जांबाज़ फौजियों के प्रोत्साहन के लिए एक फ़ोन-इन-प्रोग्राम “हैलो कारगिल” नियमित रूप से प्रसारित किया जो सेना और आम नागरिकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ | सेना के जवानों के लिए उन्होंने बाद में एक और कार्यक्रम डिजाइन किया जिसका नाम था “जयमाला सन्देश” जो फौजियों के नाम उनके परिजनों के पत्रों पर आधारित था |
विविध भारती पर केंद्र निदेशक राजेश रेड्डी ने भी कुछ नए कार्यक्रम शुरू किये जिनके नाम हैं उजाले उनकी यादों के , सखी-सहेली , सदाबहार नगमें , गुलदस्ता , तेरे सुर-मेरे गीत ,हिट सुपरहिट , फेवरेट फ़ाइव , एस.एम.एस के बहाने वीबीएस के तराने | राजेश रेड्डी के कार्यकाल में ही विविध भारती के लिए पंचरंगी सेवा के बदले देश की सुरीली धड़कन कहा जाने लगा | इस सेवा में बाद में कुछ और कार्यक्रम जोड़े गए जैसे विविध भारती के संग्राहलय की रिकॉर्डिंग्स पर आधारित विविधा | विविध भारती के कुछ बेहद लोकप्रिय कार्यक्रमों के नाम हैं जयमाला , मनचाहेगीत , हवामहल , उजाले उनकी यादों के , बॉम्बे टॉकज़ , एस.एस.के बहाने वीबीएस के तराने , हैलो फ़रमाइश , संगीत सरिता , उजाले उनकी यादों के , सखी-सहेली , छाया गीत, सदाबहार नगमें और भूले बिसरे गीत .




