FOURTHPILLARSNEWS UPDATE 07.11.2025
मां भारती की वंदना करने वाले राष्ट्र गीत वन्देमातरम् की रचना हुए 150 वर्ष पूर्ण हुए….इस ऐतिहासिक अवसर के उपलक्ष्य में आज 7 नवम्बर को नयी दिल्ली के इंदिरागांधी इनडोर स्टेडियम में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कई चरणों में संपन्न होने वाले “सामूहिक राष्ट्रीय गीत स्मरणोत्सव कार्यक्रम” का शुभारम्भ किया.
वंदे,अर्थात वंदना और मातरम् शब्द का अर्थ है माँ,अर्थात वह ,जिसने जन्म दिया

इस आयोजन के दौरान वन्देमातरम् के इतिहास पर केन्द्रित एक लघु वृतचित्र का भी प्रदर्शन किया गया और स्मारक डाक टिकट और सिक्के का विमोचन किया गया.देश भर में कार्यक्रम का पहला चरण 7 नवम्बर से 14 नवम्बर 2025 तक , दूसरा चरण 19 से 26 जनवरी 2026 तक , तीसरा चरण 7 से 15 अगस्त 2026 तक और चौथा चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा. इस दौरान ग्राम पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक सभी शासकीय कार्यालयों , शैक्षिक और अन्य संस्थानों में साल भर चार चरणों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे

“वन्दे मातरम्” गीत संस्कृत में लिखा गया है, जो भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण भाषा है और इसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाता है। संस्कृत गीत वन्दे मातरम् बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा बाँग्ला लिपि में लिखा गया था जो पहली बार 1882 में छपे उनके उपन्यास आनन्द मठ का हिस्सा था.. समय के साथ, यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए विदेशी सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध का नारा बन गया। वंदे मातरम को बैठकों, जुलूसों और सार्वजनिक सभाओं में एक प्रेरणादायक गीत के रूप में गाया जाने लगा। वर्ष गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने वर्ष 1896 में कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वार्षिक बैठक में वंदे मातरम का पाठ किया था।




इसने सदियों की गुलामी से कमजोर भारत में नई जान फूंक दी। 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत के रूप में अपनाए जाने के बाद, संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन-गण-मन के समान ही सम्मान देने ही घोषणा की।
सन् 2003 में, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में, उस समय तक के सबसे मशहूर दस गीतों का चयन करने के लिये दुनिया भर के लगभग 7 हज़ार गीतों को चुना गया था और बी०बी०सी० के अनुसार 155 देशों के लोगों ने इस चयन में मतदान किया था जिसमें वन्दे मातरम् शीर्ष 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था।
बंकिमचंद्र चटर्जी की पहचान बांग्ला कवि, उपन्यासकार, लेखक और पत्रकार के रूप में थी । उनकी प्रथम प्रकाशित रचना अंग्रेज़ी में प्रकाशित “राजमोहन्स वाइफ” थी। उनकी पहली प्रकाशित बांग्ला कृति थी ‘दुर्गेशनंदिनी’ मार्च जो 1865 में प्रकाशित हुई छपी थी… उन्होंने 1872 में मासिक पत्रिका “बंगदर्शन” भी प्रकाशन किया था । अपनी इस पत्रिका में उन्होंने 1873 में विषवृक्ष नामक अपने उपन्यास का क्रमिक रूप से प्रकाशन किया था । बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म उत्तरी चौबीस परगना के कंठालपाड़ा, नैहाटी में एक परंपरागत और समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा हुगली कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई




