आज मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय वार्ता पर की चर्चा

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा करेंगे और आपसी हित के क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। वार्ता के बाद व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया से संबंधित क्षेत्रों सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

राष्ट्रपति पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए कल शाम नई दिल्ली पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी ने हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की।

श्री पुतिन आज राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद राष्‍ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्‍वागत किया जायेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज शाम श्री पुतिन के सम्मान में भोज का आयोजन करेंगी। भारत और रूस अपनी रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की 25वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19 बार मिल चुके हैं। वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा संस्थागत संवाद तंत्र है। प्रधानमंत्री मोदी को पिछले साल जुलाई में रूस का सर्वोच्च सम्मान आर्डर ऑफ द होली एपोस्टल एंड्रयू द फर्स्ट से सम्मानित किया गया था। 2024-25 में दोनों देशों का व्यापार 68 बिलियन डॉलर से ज्यादा के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, दोनों नेताओं ने 2030 तक व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, दोनों देश गगनयान मिशन पर मिलकर काम कर रहे हैं, जो भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है।

हाल ही में रूस के कज़ान और यकथरिन वर्ग में भारत के वाणिज्यिक दूतावासों का उद्घाटन किया गया।

राष्ट्रपति पुतिन का दौरा दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नई दिल्ली आगमन पर उन्हें रूसी भाषा में श्रीमद भगवद गीता की एक प्रति भेंट की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, श्री मोदी ने कहा कि गीता की शिक्षाएँ दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।


इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत–रूस सहयोग किसी देश के विरुद्ध नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों पर उन्होंने कहा कि कुछ देश रूस के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को नापसंद करते हैं और वे राजनीतिक कारणों से इसमें रूकावटें पैदा करके भारत के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत आने से पहले एक टीवी चैनल में दिए साक्षात्‍कार में श्री पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आसानी से दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं और भारत के लोगों को उन पर गर्व है।

उन्‍होंने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमरीका की आपत्ति को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि अमरीका को रूस से तेल खरीदने का अधिकार है तो भारत को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।

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