समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को कंट्रोल करने की तैयारी में है ईरान

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ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य को एक ‘डिजिटल टोल बूथ’ बना सकता है। दरअसल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया आउटलेट्स सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के बड़े नेटवर्क के जरिए पैसा कमा सकते हैं। अगर उनका प्रस्ताव पास हुआ तो मेटा और गूगल जैसी टेक कंपनियों से पैसे वसूले जा सकते हैं और इससे दुनिया भर में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

समुद्र के नीचे बिछी केबल कट जाने से पूरी दुनिया में इंटरनेट ठप हो सकता है।

अगर ऐसा हुआ तो इससे दुनिया भर के इंटरनेट यूजर पर भारी असर देखने को पड़ सकता है।

ईरान अब इसका ही फायदा उठाने की कोशिश में है। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, हर जहाज से 2 मिलियन (10 लाख) डॉलर वसूलने और समुद्र के नीचे बिछी केबलों को काटने की धमकी देने के बाद ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को एक ‘डिजिटल टोल बूथ’ में बदलना चाहता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया आउटलेट्स सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग (स्ट्रेटेजिक वाटर वे) से गुजरने वाले समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के बड़े नेटवर्क से राजस्व यानी इनकम कमाएं। इसका साफ मतलब है कि IRGC दुनिया भर में इंटरनेट की जरूरत को देखते हुए इसका फायदा उठाकर पैसा कमाना चाहता है।

इसके अलावा, टेक कंपनियों को इन केबलों की मरम्मत और रखरखाव का पूरा कंट्रोल ईरानी कंपनियों को देना पड़ सकता है।

अगर ईरान इस डिजिटल टोल को लागू करता है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

तस्नीम न्यूज एजेंसी (ईरान इंटरनेशनल के जरिए) की एक रिपोर्ट (REF.) के मुताबिक, ईरानी अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य को एक छिपे हुए हाईवे के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिससे हर दिन 10 ट्रिलियन (यानी 10 खरब) डॉलर से ज्यादा के वित्तीय लेन-देन होते हैं। कहा जा रहा है कि वे समुद्र के नीचे बिछी इन केबलों के इस्तेमाल के लिए फीस वसूलने के लिए तीन फेज की योजना बना रहे हैं।

गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां इन नए ऑपरेशनल खर्चों को गूगल वन या माइक्रोसॉफ्ट 365 जैसी सेवाओं के लिए मिल रहे सब्सक्रिप्शन को महंगा करके ग्राहकों से निकाल सकती हैं।

अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत महंगा या कानूनी तौर पर जोखिम भरा हो जाता है, तो टेक कंपनियों को डेटा को लंबे रास्तों से भेजना पड़ सकता है

मीडिया आउटलेट्स तस्नीम और फार्स ने इन जरूरी कम्युनिकेशन लाइनों से कमाई करने की एक खास रणनीति बताई है। इन लाइनों से 99% से ज्यादा इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है। इस योजना में विदेशी टेक कंपनियों से जलडमरूमध्य से गुजरने वाली केबलों के लिए शुरुआती और सालाना ट्रांजिट टैक्स या टोल वसूलना शामिल है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर मेटा, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों का डेटा इस इलाके से गुजरता है, तो ईरान उनसे ईरानी कानूनों के तहत काम करने की शर्त भी रख सकता है।

समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से लेटेंसी बढ़ जाएगी और ऑनलाइन गेमिंग में रुकावट आएगी और 4K स्ट्रीमिंग धीमी हो जाएगी।

टेक कंपनियों को स्थानीय कानूनों के तहत काम करने के लिए मजबूर करके इन केबलों से गुजरने वाला यूजर डेटा लोकल निगरानी या डेटा शेयरिंग नियमों के दायरे में आ सकता है। इन उपायों को लागू करके IRGC का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को पैसा बढ़ाने का एक बड़ा केंद्र और ग्लोबल मंच पर डिजिटल पावर का एक मजबूत जरिया बनाना है।

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