रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में आयोजित एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) “प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता” के चौथे दिन “शासकीय कार्यालयों में क्रय नियम” विषय पर महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया।

23 अगस्त 2026 को आयोजित सत्र में मुख्य वक्ता श्री प्रणव सिंह, संयुक्त संचालक, छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा, रायपुर ने शासकीय कार्यालयों में क्रय प्रक्रिया से संबंधित नियमों एवं प्रक्रियाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। सत्र के प्रारंभ में डॉ. रचना मिश्रा ने पिछले दिवस के सत्र की रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा वक्ता का परिचय कराया।
श्री प्रणव सिंह ने बताया कि शासकीय क्रय केवल सामग्री खरीदने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें आवश्यकता का आकलन, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, उपयुक्त क्रय पद्धति का चयन, विक्रेता का चयन, सामग्री की प्राप्ति एवं सत्यापन, भुगतान तथा अभिलेखों का उचित संधारण शामिल है। उन्होंने पारदर्शिता, मितव्ययिता, दक्षता, निष्पक्षता, प्रतिस्पर्धा, जवाबदेही एवं सार्वजनिक धन के उचित उपयोग को शासकीय क्रय प्रक्रिया का आधार बताया।
सत्र में सामान्य वित्तीय नियम (GFR), विशेष रूप से नियम 142 से 176, की प्रमुख व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। साथ ही छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम, 2002, जेम (GeM) के माध्यम से क्रय तथा निविदा प्रक्रिया की जानकारी दी गई। वक्ता ने कहा कि शासकीय संस्थाओं में क्रय करते समय उस समय लागू नियमों, शासन के निर्देशों एवं संशोधनों का पालन आवश्यक है।
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) की भूमिका पर विशेष चर्चा करते हुए प्रतिभागियों को आवश्यकता निर्धारण, उपयुक्त सामग्री एवं विक्रेता की पहचान, उपलब्ध विकल्पों की तुलना तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार क्रय की जानकारी दी गई। उन्होंने तकनीकी विनिर्देश तैयार करते समय वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखने तथा किसी विशेष विक्रेता को लाभ पहुंचाने वाले अनावश्यक प्रावधानों से बचने पर भी जोर दिया।

श्री सिंह ने क्रय समिति (Purchase Committee) की भूमिका, दरों की युक्तिसंगतता, तुलनात्मक मूल्यांकन, उचित दस्तावेजीकरण तथा निविदा प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को भी समझाया। साथ ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने क्रय प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं ईमानदारी बनाए रखने तथा पक्षपात एवं हितों के टकराव से बचने की आवश्यकता बताई।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजली भटनागर ने कहा कि शासकीय संस्थानों में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी के लिए क्रय संबंधी शासकीय नियमों की जानकारी एवं उनका सही अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमों की जानकारी से न केवल कार्य में दक्षता आती है, बल्कि वित्तीय अनुशासन एवं संस्थागत जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मंजू वर्मा ने कहा कि पिछले चार दिनों में आयोजित सत्र अत्यंत उपयोगी, प्रासंगिक एवं ज्ञानवर्धक रहे और इनसे प्रतिभागियों को प्रशासनिक कार्यों की व्यावहारिक समझ प्राप्त हो रही है।

आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए डॉ. नियति गुरुद्वान ने बताया कि एफडीपी के आगामी दिनों में भी प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से आगामी सत्रों में भी सक्रिय सहभागिता बनाए रखने का आग्रह किया।
अंत मे श्री सिंह ने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का सहज एवं सरल उत्तर दिए।
सत्र के अंत में श्री रेणु कुमार यादव ने आभार प्रदर्शन किया। आयोजन सचिव श्री लखपति पटेल ने कार्यक्रम की आवश्यक व्यवस्थाओं एवं समन्वय की जिम्मेदारी संभाली, जबकि सह-समन्वयक डॉ. अनिल रामटेके ने सत्र के सफल संचालन में सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। एफडीपी में 130 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।
[23/08, 10:40 pm] Shirin Siddique: श्री प्रणव सिंह सर डिप्टी कलेक्टर रैंक अधिकारी है और वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी निमोरा में संयुक्त संचालक है, कल उनका हमारे महाविद्यालय में चल रहे एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में लेक्चर था, plz news लगा दीजिये



