रायपुर, 02.02.2026 शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में महाविद्यालयीन प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला की श्रृंखला में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए ’’समय एवं तनाव प्रबंधन’’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संयोजक ’’डॉ. मोना जैन’’ ने बताया कि इस व्याख्यान हेतु रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास को मुख्य वक्ता के रुप में आमंत्रित किया गया था।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरक और मार्गदर्शक साबित हुई, तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उन्हें नई दिशा और उत्साह प्रदान करने वाली रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक डॉ. मोना जैन द्वारा डॉ. गोवर्धन व्यास के स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया। इसके पश्चात् डॉ. लखपति पटेल द्वारा मुख्य वक्ता डॉ. व्यास का परिचय प्रस्तुत किया गया। डॉ. व्यास ने अपने व्याख्यान की शुरुआत यह कहकर की कि ’“समय सबसे बड़ा निवेश है- इसे बर्बाद करना किसी भी लक्ष्य की दिशा में बाधा है।”’ उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का रहस्य ’’समय का सही प्रबंधन’’ और ’’निरंतर प्रयास’’ है।
प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन समिति द्वारा समय एवं तनाव प्रबंधन पर विशेष व्याख्यान का आयोजन

’’लक्ष्य निर्धारण’’ समय प्रबंधन का पहला कदम है, क्योंकि बिना लक्ष्य के परिश्रम असंगठित और अप्रभावी हो जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह सलाह दी
’अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से लिखें, उसे छोटे-छोटे चरणों में विभाजित करें और हर दिन अपने लक्ष्य की दिशा में निश्चित कदम उठाएं।” तनाव प्रबंधन पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अत्यधिक तनाव न केवल मानसिक क्षमता को कम करता है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने सुझाव दियाः “तनाव को दोस्त बनाइए, दुश्मन नहीं। समय-समय पर आराम, ध्यान और शारीरिक व्यायाम से अपने मन को शांत रखें। जो व्यक्ति मानसिक संतुलन बनाए रखता है, वही कठिन परिस्थितियों में भी सफलता पाता है।

”डॉ. व्यास ने ’’सकारात्मक सोच’’ और ’’आत्मविश्वास’’ की महत्ता भी बताई। उनके अनुसार ’“विफलताओं से डरने की बजाय उन्हें सीखने का अवसर समझें।
सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-विश्वास वह ऊर्जा है जो हर चुनौती को अवसर में बदल देता है।” व्याख्यान में उन्होंने प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि ’’समय और तनाव का संतुलन’’ कैसे सफलता की दिशा में मार्गदर्शक बन सकता है। डॉ. व्यास ने अपने व्याख्यान को और प्रेरक बनाने के लिए कई सफलता की कहानियाँ प्रस्तुत कीं। इन उदाहरणों से विद्यार्थियों को यह संदेश मिला कि कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रयास, धैर्य और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने अनुशासन, लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया।
उन्होंने कहा ’“सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं आती, बल्कि कड़ी मेहनत को सही समय और योजना के साथ करने से आती है। समय का सदुपयोग और मानसिक स्थिरता आपकी सबसे बड़ी पूँजी है।” इस अवसर पर महाविद्यालय के आईक्यूएसी संयोजक डॉ. मंजू वर्मा, सहायक प्राध्यापक डॉ. अंजलि चंद्रवंशी इत्यादि सदस्य भी उपस्थित थे। अंत में कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. पिंकी गर्ग द्वारा किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता, समिति के सदस्य, आईक्यूएसी संयोजक डॉ. मंजू वर्मा, डॉ. अंजलि चंद्रवंशी और उपस्थित विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।




