सरकार ने मोबाइल हैंडसेट की प्रमाणिकता की पुष्टि के लिए मोबाइल में संचार साथी ऐप, पहले से इंस्टॉल करने के निर्देश जारी किए हैं।
संचार साथी पॉर्टल को साल 2023 में बनाया गया था. इस पोर्टल का मकसद खोए हुए मोबाइल फोन और फ्रॉड करने के लिए भेजे गए वेब लिंक की रिपोर्ट करने और उन्हें ब्लॉक करने की सुविधा देता है.
यह यूजर्स के नाम पर मोबाइल कनेक्शनों की संख्या जानने और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय कॉन्टेक्ट्स की जांच करने में भी मदद करता है.
ऐप के जरिए धोखाधड़ी की रिपोर्ट करना बेहद आसान होता है, क्योंकि इसकी टेक्नोलॉजी बेहद एडवांस है, जिसकी वजह से यूजर्स को अपना IMEI नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होती है.
संचार साथी ऐप यूजर्स के नाम पर जारी किए गए मोबाइल कनेक्शनों की जांच, हैंडसेट की असली होने की पुष्टि, और संदिग्ध संचार या स्पैम की रिपोर्ट भी करता है.
संचार साथी ऐप यूजर्स को भारतीय नंबर से होने वाली इंटरनेशनल कॉल की रिपोर्ट करने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए फोन पर ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है.

भारत में अब सभी नए मोबाइल फोन में ‘संचार साथी ऐप’ पहले से इंस्टॉल होगा.
नागरिकों को नकली हेंडसेट खरीदने से बचने, दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दूरपयोग की आसान रिपोर्टिंग और संचार साधन पहल की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए दूरसंचार विभाग ने मोबाइल हैंडसेट निर्माता और आयातकों को भारत में उपयोग के लिए निर्मित या आयातित, सभी मोबाइल हैंडसेट में संचार साथी मोबाइल एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल करने का निर्देश दिया है। विभाग ने कहा कि पहले से इंस्टॉल किया गया संचार साथी एप्लिकेशन अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए पहली बार उपयोग करने या डिवाइस सेटअप करने पर आसानी से दिखाई देने योग्य और सुलभ होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एप्लीकेशन की कार्यक्षमता को अक्षम या प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। विभाग ने मोबाइल हैंडसेट निर्माता और आयातकों को यह भी निर्देश दिया है कि वह पहले से निर्मित और भारत में बिक्री चैनलों में मौजूद उपकरणों में साफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से साथी एप को पहुंचाने का प्रयास करे। विभाग ने निर्माता को 90 दिनों के भीतर कार्यान्वयन पूरा करने और 120 दिनों में रिपोर्ट जमा करने को कहा है।





