बॉलीवुड के ही-मैन धमेंद्र आज इस दुनिया से रूख्सत हो गए। पंजाब की अपनी साधारण पृष्ठभूमि से लेकर एक दिग्गज सितारा बनने तक, धर्मेंद्र देओल का जीवन जुनून और सिनेमा से भरा रहा। 1935 में जन्मे धर्मेंद्र ने फिल्म दिल भी “तेरा हम भी तेरे” से फिल्म सफर की शुरूआत की और शोले, सत्यकाम,ख़ामोशी , बंदिनी, शोला और शबनम , काजल .फागुन,जुगनू ,बलैक मेल ,झील के उस पार,कीमत,सीता और गीता, राजा जानी ,दो चोर ,समाधि ,चरस,रखवाला,गुड्डी,नया ज़माना,मेरा गाँव मेरा देश,तुम हसीन मैं जवाँ,जीवन मृत्यु,इश्क पर ज़ोर नहीं,मेरा नाम जोकर,सत्यकाम,आया सावन झूम के,शिकार,मेरे हमदम मेरे दोस्त,
8 दिसंबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे और उनके ठीक-ठाक घर लौट आने के बाद खबर थी

आँखें,मझली दीदी,चन्दन का पालना,देवर,अनुपमा,फूल और पत्थर,आये दिन बहार के,ममता,आकाशदीप ,दुल्हन एक रात की, काजल,चाँद और सूरज,आप की परछाइयाँ,पूजा के फूल,मेरा कसूर क्या है,सूरत और सीरत,शोला और शबनम,बॉयफ्रैंड चुपके-चुपके, मेरा गाँव मेरा देश,यादों की बरात, शालीमार , नौकर बीवी का, आई मिलन की बेला, प्रतिज्ञा, धरमवीर जैसी फिल्मों के जरिए अपने शानदार अभिनय का परिचय दिया। छह दशकों से अधिक के करियर में, उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। धमेन्द्र को 70 के दशक में दुनिया के सबसे आकर्षक पुरूषों में से एक चुना गया था।

2012 में उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने न सिर्फ अपने अभिनय से लोगों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि अपनी जिंदादिली से भी लोगों को अपना मुरीद बनाया। वे आज बेशक हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी फिल्में और अदाकारी सदैव उनकी उपस्थिति की अनुभूति कराएंगे पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत अभिनेता को अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की है.



