शेख हसीना को मौत की सज़ा

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FOURTHPILLARSNEWS 18-11-25

बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की आग झुलस रहा है। सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं..और बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। अवामी लीग के समर्थकों और छात्र विद्रोह के बाद बने जातीय छात्र शक्ति से भिड़ गए। अवामी लीग के प्रदर्शनकारियों ने ढाका में कई हाईवे ब्लॉक कर दिए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई है।

सोमवार को सजा सुनाए के पहले ही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग, जिसे प्रतिबंधित कर दिया गया है, ने दो दिनों के लिए देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था।

बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठियों, आवाज वाले हम और आंसू गैस का इस्तेमाल किया

हिंसा में दो लोगों की मौत हुई है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने सोमवार को शेख हसीना को मौत की सजा के लिए हिंसा के मामले में मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी ठहराया गया है।

सोमवार से ही ढाका समेत देश के कई हिस्सों में अवामी लीग समर्थकों ने मार्च निकाला, जहां उनकी विरोधियों से झड़प हुई। फैसले के पहले ही यूनुस सरकार ने ढाका में भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की थी, जिसे प्रदर्शनकारियों को गोली मारने का आदेश दिया गया था। राजधानी ढाका में पूरे दिन तनाव बना रहा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के संस्थापक और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान का घर रहे धनमंडी 32 इलाके में पूरे दिन तनाव बना रहा। हसीना विरोधियों ने एक बार फिर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

अवामी लीग के समर्थकों और जातीय छात्र शक्ति के साथ कई जगहों पर भिड़ंत हुई। जातीय छात्र शक्ति की स्थापना पिछले साल हसीना विरोधी विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले छात्र नेताओं ने मिलकर की है।

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को उनकी शादी की सालगिरह पर मौत की सजा सुनाई गई है। हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप लगा था।

एकतरफा हुई सुनवाई में उन्हें इस अपराध का दोषी ठहराया गया और मौत की सजा का ऐलान किया गया। हालांकि, हसीना ने इस फैसले को खारिज कर दिया है।बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी बताते हुए आईसीटी ने सजा ए मौत का ऐलान किया। 17 नवंबर को ही वर्षों पहले शेख हसीना का निकाह हुआ था। जीवन के खास दिन पर ही उन्हें सबसे बुरी खबर मिली। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) की तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार दोपहर को ये फैसला सुनाया।शेख हसीना ने 1967 में शेख मुजीब के जेल में रहने के दौरान अपनी मां फजीलतुन नेसा की देखरेख में प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक एम.ए. वाजेद मिया से शादी की थी। बांग्लादेश टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फजीलतुन नेसा ने जल्दबाजी में इस जोड़े के निकाह की व्यवस्था की थी। वाजेद मिया का 9 मई, 2009 को 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

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