भारत के लिए विरासत ज्ञान और समुदाय की निरंतर धारा का प्रतीक रही है : प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

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FOURTH PILLARS NEWS 08.12.2025

यूनेस्‍को की अंतर-सरकारी समिति का 20वाँ सत्र आज नई दिल्ली के लाल किला में शुरू होगा। सत्र की अध्यक्षता यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा करेंगे।भारत ने इस वर्ष यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची के लिए प्रकाश पर्व दिपावली को नामांकित किया है। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस प्रस्ताव की पहले स्वतंत्र मूल्यांकन निकायों द्वारा समीक्षा की जा चुकी है, सत्र के दौरान चर्चा की जाएगी और सरकार को सकारात्मक परिणाम का विश्वास है। इस छह दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने के लिए सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुत नामांकनों की जाँच करना है। सत्र का उद्घाटन समारोह कल नई दिल्ली के लाल किला में आयोजित किया गया।

अंतर-सरकारी बैठक सिर्फ़ गर्व की बात नहीं है, यह इस बात की भी याद दिलाती है कि हमारी जीवंत परंपराएँ हमारे अतीत से जुड़ी हैं और हमारे भविष्य को आकार देती हैं।

इस अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यूनेस्को के कई विरासत स्थलों का घर होने के अलावा भारत स्वयं दुनिया भर में विरासतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई परियोजनाएँ शुरू कर रहा हैं।

लखनऊ हाल ही में हैदराबाद के साथ यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त रचनात्मक शहर के रूप में हमारे देश में शामिल हो गया है। प्रत्येक अमूर्त विरासत का भारत की सेवाओं से परे भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे सम्मान न केवल सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाते हैं और हमारी परंपराओं को मज़बूत करते हैं, बल्कि जीवन और आजीविका को भी प्रभावित करते हैं। दुनिया मूलतः एक बहुलवादी परिदृश्य है, और इसकी समृद्धि वास्तव में इसकी विविधता में निहित है।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह आयोजन जीवंत परंपराओं की रक्षा के लिए देश की प्रतिबद्धता को और मज़बूत करता है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि भारत के लिए विरासत कभी भी पुरातन के प्रति मोह नहीं बल्कि यह ज्ञान और समुदाय की निरंतर धारा का प्रतीक रही है। श्री मोदी ने यह बात नई दिल्ली में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए यूनेस्को की अंतरसरकारी समिति के 20वें सत्र के उद्घाटन समारोह में अपने संदेश में कही। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है भारत के लिए विरासत कभी भी पुरातन के प्रति का मोह नहीं रहा बल्कि यह ज्ञान और समुदाय की निरंतर धारा का प्रतीक रही है।

भारत का हमेशा से यह मानना है कि सांस्कृतिक विरासत सिर्फ़ पत्थर या पांडुलिपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवंत और गहराई तक अमूर्त है।

श्री मोदी ने यह बात नई दिल्‍ली में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए यूनेस्‍को की अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के उद्घाटन समारोह में अपने संदेश में कही। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत का ‘विकास भी, विरासत भी’ का नारा यह सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता है कि आधुनिकीकरण और शहरीकरण सांस्कृतिक जड़ों को मिटाने के बजाय संस्कृति को मज़बूत करे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी परंपरा, कोई भी कलाकार और कोई भी समुदाय अनदेखा या बिना समर्थन के न रहे। श्री मोदी ने कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेज़बानी करना भारत के लिए बहुत गर्व का क्षण है उन्‍होंने कहा कि यह सत्र प्राचीन विरासत और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का काम करेगा।

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