राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समाज के व्यापक हित में आयुर्वेद में आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया है। आज नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम् 2026’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार ने नई ऊर्जा के साथ आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की प्राचीन परंपरा को वैज्ञानिक मानकों पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि आयुष मंत्रालय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा के वैश्विक मानकीकरण को मजबूत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर काम कर रहा है।
युवाओं से आयुर्वेद के क्षेत्र में अपना योगदान देने का आग्रह किया।

यहां उपस्थित युवा विद्यार्थियों तथा प्रोफेशनल लाइफ की शुरुआत कर रहे हैं शोधकर्ताओं से मैं यह कहना चाहूंगी कि आयुर्वेद का भविष्य आपके हाथों में है। आप सभी को जिज्ञासा, सत्यनिष्ठा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यवहारिक सोच और अपने क्षेत्र में श्रेष्ठ साक्ष्य निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ाना होगा।
राष्ट्रपति ने महिलाओं से आयुर्वेद के क्षेत्र में जुडने का आग्रह किया।

आयुर्वेद चिकित्सा का अध्ययन करने वाली बेटियों की संख्या तो बढ़ रही है। लेकिन चिकित्सक बनने के बाद आयुर्वेद से जुड़े प्रोफेशन में बने रहने वाली महिलाओं की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ रही। इन महिला चिकित्सकों आयुर्वेद से जुड़े प्रोफेशन में बने रहने और प्रगति की सीढ़ियां चढ सकने के सहयोग हो सकने वाले उपायों को सुझाया गया है। मुझे लगता है इतने ही सुझाने से पर्याप्त नहीं होगा, उसको अमल में लाने के लिए सबको सोचना होगा।

