रायपुर, 23 जनवरी 2026/ नवा रायपुर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 पूरे उत्साह और साहित्यिक गरिमा के साथ जारी है। उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में महिला साहित्यकारों के विशेष काव्य-पाठ सहित काव्य एवं व्यंग्य के कई सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 90 से अधिक नवोदित एवं समकालीन रचनाकारों ने सहभागिता की।

मंच संचालन डॉ. सीमा अवस्थी एवं सुमन शर्मा बाजपेयी ने किया।
रायपुर साहित्य महोत्सव के वृहद आयोजन के अंतर्गत जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान, छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान एवं छत्तीसगढ़ मित्र के संयुक्त तत्वावधान में महिला साहित्यकारों के विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष डॉ. सीमा निगम द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान की संरक्षक डॉ. रश्मिलता मिश्रा, श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे एवं छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला तरार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहीं।

महिला साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, नदियों की महिमा, सामाजिक सरोकार, नारी सशक्तिकरण एवं राष्ट्रभक्ति जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस सत्र में विमला माहेश्वरी, भारती यादव मेधा, पूर्वा श्रीवास्तव, पल्लवी झा, नंदिनी लहेज, दिलशाद सैफी, अनिता झा, अनामिका शर्मा ‘शशि’, प्रमदा ठाकुर, सुषमा प्रेम पटेल, पूर्णिमा तिवारी, शुभ्रा ठाकुर, धरा देवांगन, शकुंतला तिवारी, सीमा पांडेय, डॉ. ज्योति दीवान, डॉ. संध्या रानी शुक्ला, नलिनी बाजपेयी, अंजना भाके ‘कनुप्रिया’, शशि तिवारी, डॉ. तुलेश्वरी धुरंधर, प्रतिमा बनर्जी, दुर्गा पाठक, आभा श्रीवास्तव, मंजूषा अग्रवाल, कल्याणी तिवारी, प्रीति मिश्रा, चंद्र प्रभा दुबे, चंद्रकला त्रिपाठी, अर्चना जैन, खिलेश गौर सहित अनेक साहित्यकारों ने सहभागिता की। आभार प्रदर्शन डॉ. मृणालिका ओझा ने किया।

उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में आयोजित अन्य साहित्यिक सत्रों में सामूहिक काव्य-पाठ एवं व्यंग्य प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। धमतरी से श्री डूमनलाल ध्रुव के नेतृत्व में 15 सदस्यीय दल ने ग्रामीण एवं लोक संवेदनाओं से जुड़ी कविताएं प्रस्तुत कीं।
इस आयोजन ने यह भी सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की माटी में लोक संस्कृति के साथ-साथ उच्चस्तरीय वैचारिक मंथन के लिए भी एक सशक्त और उर्वर भूमि मौजूद है।
रायपुर से श्री राजशेखर चौबे के नेतृत्व में 9 रचनाकारों ने समकालीन विषयों पर व्यंग्यात्मक रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि महासमुंद से श्री अशोक शर्मा के नेतृत्व में 12 सदस्यीय समूह ने आंचलिक संस्कृति को स्वर दिया। वहीं रायपुर के श्री आशीष सिंघानिया के 7 सदस्यीय समूह ने युवा सोच और नवीन प्रयोगों से युक्त कविताओं का पाठ किया।

दिनभर चले इन सत्रों में साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। प्रत्येक प्रस्तुति पर श्रोताओं की करतल ध्वनि ने रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। आयोजकों के अनुसार रायपुर साहित्य उत्सव अब एक सांस्कृतिक आयोजन से आगे बढ़कर एक सशक्त बौद्धिक एवं साहित्यिक आंदोलन का रूप ले चुका है, जो छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को निरंतर समृद्ध कर रहा है।




रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र
रायपुर के गौरवशाली आयोजन रायपुर साहित्य उत्सव ने अपनी भव्यता और वैचारिक गंभीरता से प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के साहित्यिक और बौद्धिक जगत में एक सशक्त पहचान बनाई है। उत्सव के विभिन्न सत्रों के बीच ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, जिसने बुद्धिजीवियों, युवाओं और श्रोताओं को गहन विचार के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने अपने संतुलित और तार्किक वक्तव्य के माध्यम से भारतीय चेतना को आधुनिक संदर्भों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
श्री राम माधव ने कहा कि किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु होता है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक राजनीति से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत का चिंतन न केवल मौलिक है, बल्कि तार्किक कसौटी पर भी पूरी तरह खरा उतरता है। श्री राम माधव ने इस भ्रांति को भी सशक्त तर्कों के साथ खंडित किया कि बौद्धिकता केवल पश्चिमी दृष्टिकोण तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्र चिंतन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ-साथ आधुनिक यथार्थ को समझने की क्षमता भी रखता है। संवाद के दौरान उनके तर्कों की श्रृंखला ने विद्वानों के साथ-साथ युवाओं और सामान्य श्रोताओं को भी विशेष रूप से प्रभावित किया।




