रायपुर, 05.02.2026 ’’शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर’’ के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा ’’केंद्रीय बजट 2026-27’’ पर एक आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ’’अर्थशास्त्र विभाग एवं प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन समिति’’ के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ’’वर्तमान बजट की मुख्य बातें समझाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में मार्गदर्शन प्रदान करना’’ था।

कार्यक्रम के ’’मुख्य वक्ता’’ ’’डॉ. रविंद्र कुमार ब्रह्मे’’, प्राध्यापक, अर्थशास्त्र विभाग, ’’पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर’’ रहे। उन्होंने केंद्रीय बजट के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कई ज़रूरी बातों पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए ’’राजकोषीय घाटे को चार प्रतिशत तक सीमित’’ रखना और सार्वजनिक खर्च के प्राथमिक क्षेत्रों जैसे ’’स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा’’ में निवेश बढ़ाना बजट की मुख्य प्राथमिकताएँ हैं। बजट में ’’स्वस्थ भारत, डिजिटल इंडिया और स्किल डेवलपमेंट’’ के पहलुओं को भी आगे बढ़ाने की योजना है।
बजट का विश्लेषण प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष ’’डॉ. दीपशिखा विज’’ ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग इस प्रकार के ’’शैक्षणिक एवं मार्गदर्शक कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित करता है’’, ताकि विद्यार्थी न केवल बजट और आर्थिक नीतियों की समझ विकसित कर सकें बल्कि ’’प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता’’ के लिए रणनीति भी सीख सकें। विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक ’’डॉ. चंद्रशेखर ओझा’’ ने बजट एवं वित्तीय नीतियों पर विस्तार से चर्चा की और विद्यार्थियों को ’’राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल विकास और रोजगार के अवसरों की तैयारी’’ करने के लिए प्रेरित किया।
’’डॉ. पूर्णिमा मिश्रा’’ ने विद्यार्थियों को परंपरागत रोजगार विकल्पों के साथ-साथ ’’नए और उभरते रोजगार क्षेत्रों’’ की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में डॉ. श्रद्धा सिंह ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर बोलते हुए इसके आर्थिक, शैक्षणिक एवं रोजगारोन्मुखी प्रभावों पर संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ’’डॉ. मोना जैन, डॉ. अनीता जुनेजा एवं डॉ. शिल्पी बोस’’ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान एक ’’इंटरैक्टिव सेशन’’ भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने ’’सवाल पूछे और मुख्य वक्ता डॉ. ब्रह्मे ने उनके उत्तर दिए’’।
कार्यक्रम के अंत में श्रेयश निगम द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर ’’प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता’’ ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बजट केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह ’’राष्ट्र की विकास दिशा और प्राथमिकताओं का दर्पण’’ है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे न केवल ’’आर्थिक नीतियों और बजट के प्रमुख बिंदुओं’’ को समझें बल्कि इसका उपयोग ’’प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और भविष्य के करियर निर्माण’’ में करें। प्राचार्य ने यह भी कहा कि ’’समसामयिक आर्थिक घटनाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी’’ रखना विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे अपने भविष्य को और बेहतर ढंग से आकार दे सकें। (डाॅ. तपेश चंद्र गुप्ता )



