पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो दुनिया को चौंका रही हैं। यहां आसमान का रंग एकदम खून जैसा लाल हो गया। यह इतना डरावना और अजीब था कि इसे देखकर लोगों के लिए यकीन करना मुश्किल हो गया कि यह सच में हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें सामने आई तो इसको लेकर अपशगुन और तबाही जैसी तमाम बातें शुरू हो गईं। एक्सपर्ट ने बताया है कि लाल आसमान होने के पीछे ट्रॉपिकल साइक्लोन नरेल है।
ऑस्ट्रेलिया के शार्क बे और पिलबारा जैसे इलाकों में 27 मार्ट को आसमान वायुमंडलीय घटना ट्रॉपिकल साइक्लोन ‘नारेल’ की वजह से लाल हो गया।

मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि ट्रॉपिकल साइक्लोन नरेल अपने ऐतिहासिक रास्ते की वजह से एक दुर्लभ मौसमी घटना है।
यह भयंकर तूफान तट की ओर बढ़ा तो इसकी तेज हवाओं ने ऑस्ट्रेलिया के सूखे और वीरान अंदरूनी इलाकों से भारी मात्रा में लोहे से भरी धूल को ऊपर खींच लिया। यह धूल हवा में घुल गई और दिन के समय आसमान में अजीब सा गहरा लाल रंग छा गया। ऑस्ट्रेलिया में आसमान में रंग में आए बदलाव को प्रकाश के प्रकीर्णन यानी लाइट स्कैटरिंग से समझा जा सकता है। आम तौर पर आसमान रेले स्कैटरिंग की वजह से नीला दिखाई देता है। ऐसा तब होता है, जब सूरज की रोशनी हमारे वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के छोटे-छोटे अणुओं से टकराती है। ये अणु दिखाई देने वाली रोशनी की तरंगदैर्ध्यसे काफी छोटे होते हैं। इसलिए छोटी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी नीले रंग को असरदार तरीके से बिखेरते हैं।
यही वजह है कि दिन के समय आसमान नीला दिखाई देता है।

यह ज्ञात इतिहास का सिर्फ तीसरा ऐसा तूफान है, जिसने ऑस्ट्रेलिया के तीन अलग-अलग तटों पर दस्तक दी है।
कोई चक्रवात धूल और खनिज कणों जैसे बड़े कणों को या हवा में तैरते हुए छोटे ठोस कणों को ऊपर उठा लेता है तो इसे मी स्कैटरिंग कहते हैं। रेले के उलट मी स्कैटरिंग तब होती है, जब वायुमंडल में मौजूद कणों का आकार उन पर पड़ने वाली रोशनी की तरंगदैर्ध्य के बराबर होता है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में यही हुआ, जब धूल में आयरन ऑक्साइड या हेमेटाइट की मात्रा बढ़ गई। लोहे और ऑक्सीजन से बने इस रासायनिक यौगिक ने लाल रंग की रोशनी को रिफ्लैक्ट किया। वहीं बड़े कणों ने एक फिल्टर की तरह नीले और हरे रंग की छोटी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी को रोक दिया।
यह क्वींसलैंड से होते हुए नॉर्दर्न टेरिटरी से गुजरा और फिर पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई तट के पास दोबारा जोर पकड़ लिया।

27 मार्च को तट पर दस्तक देने से पहले यह कैटेगरी 3-4 के एक गंभीर ट्रॉपिकल साइक्लोन के तौर पर अपने चरम पर था।
इस कैटेगरी का इस्तेमाल ऐसे तूफानों के लिए किया जाता है, जिनमें हवाएं बहुत ज्यादा तबाही मचाने वाली होती हैं और इनसे संपत्ति को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
इस तूफान के साथ 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं चलीं और भारी बारिश हुई। धूल से भरे इन तूफानों के पर्यावरण और सेहत पर भी गंभीर असर पड़ते हैं। खनिज धूल की मात्रा हवा की गुणवत्ता को खतरनाक स्तर तक गिराती है और यातायात के दौरान विजिबिलिटी को प्रभावित करती है।



