SEHATNAMA_FOURTHPILLARSNEWS_24.10.25
नए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि , रात में बहुत देर से सोने के अलावा , सोने का समय बार-बार बदले जाने से शरीर के भीतर की जैविक घड़ी असंतुलित हो सकती है…ये रिपोर्ट हाल ही में ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले “जर्नल ऑफ़ स्लीप मेडिसिन” और नैशनल जिओग्रैफिक पत्रिका के हेल्थ सेक्शन में प्रकशित हुई है
नींद की कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। और अच्छी नींद से इम्यूनिटी सिस्टम स्ट्रांग होती है

शोध के अनुसार अगर कोई व्यक्ति देर रात तक जागता रहता है और अगले दिन देर तक सोते रहकर नींद की कमी को पूरा करने की कोशिश करता है तो उसका शरीर जैविक रूप से असंतुलित हो सकता है, नींद में अनीयमितता के कारण इंसान की दिमाग़ की कार्य क्षमता , ध्यान एकाग्र करने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति पर नकारात्मक असर पड़ता है, यही नहीं नींद में अनीयमितता के कारण ह्रदय रोग , मोटापा , उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है, इस शोध के लिए 18 से 65 वर्ष के आयु वर्ग के 40 हज़ार से अधिक लोगों की जीवन शैली और नींद की आदतों को आधार बनाया गया था .




नींद के घंटों की बजाय महत्वपूर्ण है सोने का समय

अच्छी नींद से, हमारी निर्णय लेने की क्षमता, फोकस करने की पावर और समस्या सुलझाने की क्षमता में बढ़ोतरी आती है। अच्छी नींद से तनाव कम होता है। नींद के दौरान हमारा शरीर और ब्रेन आराम करते हैं, जिससे तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।




