हमने पारसमणि का नाम सुना है जो पत्थर को अपने स्पर्श से सोना बना देती है एक ऐसी ही मणी हैं कौस्तुभ शर्मा
कौस्तुभ शर्मा जिनके मददगार हाथ आज तक बदल चुके हैं कई अनाथ बच्चों का जीवन …उनकी संस्था “स्किल्स शाला फ़ाउंडेशन” 2019 से बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में कार्यरत है। उनकी संस्था आगामी 24 अगस्त 2025 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में एक मानिखेज़ कार्यक्रम करने जा रही है जिसका शीर्षक है “साउंड ऑफ सोल” यानी “रूह की आवाज़- थ्री पॉइंट ओ”

इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ने के लिए आमंत्रित है मुख्य अतिथि होंगे माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका इसमें प्रसिद्ध गायक रूप कुमार राठौर विशेष रूप से उपस्थित होंगे .संस्था के संचालक कौस्तुभ शर्मा का मानना है कि , हर बेटी का बचपन सुरक्षित और उसका भविष्य उज्ज्वल होना चाहिए। जब बच्चियाँ या बच्चे अनाथ हो जाते हैं, या घरेलू हिंसा और शोषण का सामना करते हैं –तो उनके जीवन से सिर्फ़ पढ़ाई ही नहीं छिनती, बल्कि कई सबसे ज़रूरी चीज़ें भी छिन जाती हैं ।

कई बच्चे ऐसे हैं जिन पर माँ बाप का साया नहीं है , कई ऐसे हैं जो सम्बन्धियों की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के शिकार हैं , इनमें से कई ऐसे हैं जिन्हें पौष्टिक भोजन मिलना तो दूर पेट भर भोजन भी नसीब नहीं हो पाता.
कई बच्चे बड़ों के शोषण का शिकार हो जाते हैं फिर चाहे वो शारीरिक शोषण हो या श्रम का ।
ऐसे कई बच्चे जिनके लिए ज़मीन ही बिछौना और आसमान ही ओढ़ना है उनका बचपन भी उनसे छूटा हुआ है जिस उम्र में उन्हें प्यार , दुलार और भावनात्मक सुरक्षा चाहिए इनके अभाव में वो अकेलेपन , असुरक्षा और भय में जीते हैं . ऐसे वंचित बच्चों के लिए ही स्किल्स शाला फ़ाउंडेशन का मिशन है प्रोजेक्ट दुलार जिसका मकसद है लड़के और लडकियों को सुरक्षा के साथ होस्टल आवास की सुविधा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना ।

अभावग्रस्त ऐसे बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फ़ीस की व्यवस्था करना और उनको प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट संघ लोक सेवा आयोग , लोक सेवा आयोग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अलावा सभी ज़रूरी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई में मदद करना. उन्हें अपना करियर चुनने में मार्गदर्शन देना , उन्हें कौशल प्रशिक्षण देना और कार्य अनुभव में समृद्ध करना. प्रोजेक्ट दुलार के तहत जिन लड़के लड़कियों की देखभाल की ज़िम्मेदारी स्किल्स शाला फ़ाउंडेशन द्वारा उठाई जाती है उनका स्वास्थ्य बीमा करवाना और नियमित मेडिकल चेकअप करवाना , उनकी काउंसलिंग करना और उनके बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में सहयोग देना ।

कौस्तुभ शर्मा सूफी संत हज़रत रूमी रूमी की पंक्तियों का उदहारण देते हैं कि , “बारिश की फुहार में ही फूल उगते हैं…बादलों के गरजने से नहीं ..और यह यथार्थ है
परिवेश! किसी भी बच्चे के विकास प्रगति के लिए सबसे ज़रूरी महत्वपूर्ण होता , और यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को समृद्ध भविष्य देना है , तो हमें उन्हें एक सुरक्षित और प्रेरणादायी वातावरण देना ही होगा।आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर प्रत्येक वर्ष लगभग 20 लाख बच्चे सिर्फ आर्थिक अभाव के कारण प्राथमिक शिक्षा छोड़ देते हैं। इसी चुनौती को देखते हुए हमारी संस्था –“ स्किल्स शाला फ़ाउंडेशन” ने एक पहल की जिसे नाम दिया गया “अभ्यास का पिटारा”।





इस पिटारे में बच्चों को मिलती है –पूरे स्कूली सत्र के लिए ज़रूरी स्टेशनरी सामग्री जैसे किताबें, विभिन्न नोटबुक्स, पेन-पेन्सिल, इरेज़र आदि हमारी संस्था का एक और अनूठा प्रयास है : “स्नेह का बक्सा”। कौस्तुभ शर्मा बताते हैं कि हर साल लगभग 2.3 करोड़ किशोरियाँ हर वर्ष मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन की कमी के कारण स्कूल छोड़ देती हैं , शिक्षा में अवरोध के इस सामाजिक अभिशाप को वरदान में बदलने के लिए हमने शुरू किया – “स्नेह का बक्सा”।

जब बच्चियाँ या बच्चे अनाथ हो जाते हैं, या घरेलू हिंसा और शोषण का सामना करते हैं तो उनके जीवन से सिर्फ़ पढ़ाई ही नहीं छिनती, बल्कि सबसे ज़रूरी चीज़ें भी उनसे छिन जाती हैं:
इसमें बच्चियों को अपनी निजी स्वच्छता के लिए मिलते हैं –सैनिटरी पैड्स, मल्टीविटामिन और कैल्शियम टैबलेट्स, प्रिकली हीट पाउडर और एंटीसेप्टिक साबुन। आँखों में चमक लिए कौस्तुभ शर्मा भावुक होकर कहते हैं आज… हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम मिलकर अपने बच्चों को बेहतर परिवेश दें, ताकि वे एक उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें। उनका कहना है जो लोग एक व्यक्ति , समुदाय या संस्था के रूप में इस पुनीत कार्य में सहभागी होना चाहते हैं उनका हार्दिक स्वागत है .






