नोबेल पुरस्कारों के चयन से जुडी समिति ने सन 2025 के “नोबेल शांति पुरस्कार” के लिए वेनेज़ुएला की “मारिया कोरिना मचाडो” के नाम की घोषणा की है उन्हें ये पुरस्कार अपने देश में लोकतान्त्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और विगत 20 वर्षों से लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए जारी उनके संघर्ष और हौसले को सम्मानित करने के लिए दिया जाएगा




मारिया ने अपने देश में 2013 से सत्तासीन तानाशाह निकोलस मादुरो के निरंकुश शासन के विरुद्ध 2024 में अपनी आवाज़ बुलंद की

नोबेल पुरस्कारों के चयन से जुडी समिति ने मारिया को महिला शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक माना है … “मारिया कोरिना मचाडो” अपने देश में आयरन लेडी (लौह महिला ) के नाम से प्रसिद्द हैं ….मारिया ने अपने देश में 2013 से सत्तासीन तानाशाह निकोलस मादुरो के निरंकुश शासन के विरुद्ध 2024 में अपनी आवाज़ बुलंद की थी जिसके बदले में उन्हें हत्या की धमकियाँ मिलने लगीं जिसके चलते वो अपने देश में छिपकर रहने को बेशक मजबूर हैं लेकिन उनकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सका है
आज मारिया अपने देश की लाखों महिलाओं की प्रेरणा हैं
आज मारिया अपने देश की लाखों महिलाओं की प्रेरणा हैं…1967 में जन्मी मारिया उद्योग इंजीनयरिंग में स्नातक हैं और हॉवर्ड से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर हैं….अपने देश में लोकतंत्र और लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए मारिया कोरिना मचाडो ने अपने शुरूआती संघर्ष के दिनों में चुनावों में पारदर्शिता लाने के मकसद से नागरिक सामजिक संगठन “सूमाते” का गठन किया था जिसके माध्यम से उन्होंने सन 2004 के चुनावों के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के विरुद्ध जनमत संग्रह अभियान चलाया था

सन 2004 के चुनावों के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के विरुद्ध जनमत संग्रह अभियान चलाया था
2014 में उन्हें संसद में विपक्ष की ओर से सबसे अधिक मत मिले थे लेकिन “अमेरीकी महाद्वीपीय संगठन” के मंच पर जब उन्होंने अपने देश की वास्तविकता बयान की उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गयी और उनपर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए गए बावजूद इसके वो पूरी निर्भीकता से लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष करती रहीं.




