रायपुर, 18 फरवरी 2026 शासकीय जे. योगानंदम् छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के एम.एससी. रसायन विज्ञान के विद्यार्थियों ने 16 एवं 18 फरवरी 2026 को दो दिनों में तीन प्रमुख संस्थानों का विस्तृत शैक्षणिक भ्रमण किया। इस शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत 16 फरवरी को दो संस्थानों तथा 18 फरवरी को एक संस्थान का भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रकार का अनुभवात्मक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ उनके शोध एवं व्यावसायिक कौशल को भी सशक्त करता है।
प्रथम भ्रमण – रसायन शास्त्र विभाग पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अनुभवात्मक एवं कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल देती है।
रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक शोध वातावरण से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और अनुसंधान दृष्टि को सुदृढ़ करता है। डॉ. व्यास ने यह भी बताया कि विभाग भविष्य में समय-समय पर ऐसे अनुभवात्मक शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों को उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी प्रयोगशालाओं में कार्य करने के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैज्ञानिक वातावरण में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपकरणों का प्रत्यक्ष ज्ञान और प्रयोगात्मक दक्षता भी अत्यंत आवश्यक है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे भ्रमण उनके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं, अनुसंधान के प्रति रुचि जगाते हैं और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाते हैं।

16 फरवरी को विद्यार्थियों ने सर्वप्रथम पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग का भ्रमण किया। जहाँ विभागाध्यक्ष डॉ. मानस कांति देब ने उनका आत्मीय स्वागत करते हुए प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन, औद्योगिक विकास और वैज्ञानिक नवाचार का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगों के माध्यम से सीखने, अनुसंधान की ओर उन्मुख होने तथा जिज्ञासु दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष ने बताया कि उच्च शिक्षा में सफलता के लिए अनुशासन, सतत अध्ययन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक हैं। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनमोहन लाल सतनामी ने विभाग की नवीनतम शोध उपलब्धियों, प्रचलित परियोजनाओं और डीएसटी-पर्स परियोजना के अंतर्गत स्थापित अत्याधुनिक उपकरणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्नत अनुसंधान के लिए मूलभूत अवधारणाओं की स्पष्ट समझ और उपकरणों का व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सतनामी ने विद्यार्थियों को नैनो-विज्ञान के अनुप्रयोगों, स्वर्ण नैनोकणों के संश्लेषण, उनके रंग परिवर्तन और अभिक्रिया गतिकी का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाया। उन्होंने समझाया कि नैनो-विज्ञान चिकित्सा, पर्यावरण एवं उद्योग क्षेत्रों में तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है।

डॉ. कमलेश श्रीवास ने विभिन्न विश्लेषणात्मक तकनीकों के औद्योगिक एवं शोध उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक उपकरणों के माध्यम से सूक्ष्म स्तर पर पदार्थों का विश्लेषण संभव हो पाता है, जो दवा निर्माण, पर्यावरण परीक्षण एवं सामग्री विज्ञान में अत्यंत उपयोगी है। डॉ. इंद्रपाल करभाल ने विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकों से अनुसंधान करने की प्रक्रियाओं, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक नैतिकता के महत्व को विस्तार से समझाया।
विद्यार्थियों ने फूरियर ट्रांसफॉर्म अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी, परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी, स्पेक्ट्रोफ्लुओरोमीटर, इलेक्ट्रोस्पिनिंग मशीन, बीईटी विश्लेषक, ग्लव बॉक्स, ओसी-ईसी विश्लेषक, त्रि-आयामी मुद्रक आदि उपकरणों का अवलोकन किया। एनआरएनसी में एनएमआर, द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमेट्री, एचपीएलसी, पीसीआर एवं आरटी-पीसीआर प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण कराया गया।
द्वितीय भ्रमण – मूल विज्ञान केंद्र पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय

इसके पश्चात विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के मूल विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया। यहाँ डॉ. भानुश्री गुप्ता ने प्रयोगशालाओं का विस्तारपूर्वक परिचय कराया। उन्होंने कहा कि बुनियादी विज्ञान की गहन समझ ही उच्च स्तरीय अनुसंधान की आधारशिला होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रयोगात्मक त्रुटियों को न्यूनतम रखना और डेटा की शुद्धता बनाए रखना एक सफल वैज्ञानिक की पहचान है।
विद्यार्थियों को पराबैंगनी–दृश्य स्पेक्ट्रोस्कोपी, प्रतिदीप्ति मापन, पृष्ठ तनाव मापक, घूर्णन वाष्पक और अल्ट्रासोनिक क्लीनर का प्रदर्शन कराया गया। उपकरणों के सिद्धांत, संरचना और अनुप्रयोगों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के साथ विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रयोगात्मक तकनीकों का अनुभव भी किया।
महाविद्यालय की प्रभारी अनुराधा चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक वैज्ञानिक परिवेश से परिचित कराते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे प्रयोगशालाओं में प्राप्त अनुभव का अधिकतम लाभ लें और आत्मनिर्भर वैज्ञानिक बनने की दिशा में प्रयास करें।
18 फरवरी – ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी एंड रिसर्च सेंटर

18 फरवरी को विद्यार्थियों ने ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी एंड रिसर्च सेंटर का शैक्षणिक भ्रमण किया। प्रयोगशाला के नियंत्रक एवं ड्रग कंट्रोलर डॉ. नगेंद्र सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए औषधि परीक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया, नियामकीय मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण की वैज्ञानिक चुनौतियों और करियर अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दवा को बाजार में आने से पहले कठोर परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे उसकी शुद्धता, प्रभावकारिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. चंदन साहू ने विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं का विस्तृत भ्रमण कराया और विभिन्न परीक्षण प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि विश्लेषणात्मक तकनीकों की सटीकता और मानकीकरण दवा परीक्षण की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं।
श्री हरे कृष्णा ने यूवी-विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, एटॉमिक एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, पीएच मीटर, डिजिटल रिफ्रैक्टोमीटर, मफल फर्नेस, मॉइस्चर बैलेंस, डिसोल्यूशन एवं डिसइंटीग्रेशन उपकरण, एचपीएलसी और एचपीटीएलसी की कार्यप्रणाली और उनके व्यावहारिक उपयोग को विस्तार से समझाया। विद्यार्थियों ने उपकरणों के संचालन की बारीकियों को समझते हुए कई तकनीकी प्रश्न भी पूछे।
डॉ. गोवर्धन व्यास ने समापन अवसर पर कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं औद्योगिक क्षेत्रों में करियर के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इस प्रकार की अनुभवात्मक एवं कौशल आधारित शैक्षणिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्राचार्य ने रसायन शास्त्र विभाग के सभी प्राध्यापकों और सहयोगी सदस्यों की विशेष रूप से प्रशंसा की, जिन्होंने इन शैक्षणिक भ्रमणों को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे ही ज्ञानवर्धक, कौशलवर्धक और शोधोन्मुखी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की, ताकि विद्यार्थियों को निरंतर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो और वे प्रतिस्पर्धी वैज्ञानिक वातावरण मंञ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।




