भारतीय सेना और सेब उत्पादक किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है मालगाड़ी

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देश के उत्तरी पहाड़ी इलाक़े की दुर्गम चौकियों पर तैनात जवानों के लिए ज़रूरी रसद , हथियार ,गोलाबारूद और दवाईयां , कपड़े और ज़रुरत का अन्य सामान हवाई या सड़क मार्ग से पहुंचाया जाता था लेकिन अब कश्मीर में भारतीय सेना ने सर्दियों के लिए अपनी अग्रिम चौकियों में लद्दाख में मौजूद 14 वीं कोर और कश्मीर स्थित 15 वीं कोर के लिए रसद पहुंचाने के लिए मालगाड़ी को चुना है.

अच्छी बात ये है कि ये मालगाड़ी जहाँ फ़ौज के लिए जीवन रेखा साबित हो रही है वहीँ इसका लाभ कश्मीर के सेब उत्पादक किसानों को भी मिल रहा है.

इस ट्रेन के ज़रिये में सेना के अग्रिम भण्डारण के लिए 753 मीट्रिक टन का सामान ले जाया गया जिसे सेना की विभिन्न यूनिटों और ठिकानों तक पहुंचाया गया।

मालगाड़ी से कृषि उत्पादों की ढुलाई सस्ती पड़ती है

विदित हो इसी 12 और 13 सितम्बर को , उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल मार्ग पर सेना की ज़रुरत का सामान धोने के लिए पहली विशेष मालगाड़ी बीडी बाड़ी से अनंतनाग तक चलाई गई।

इस ट्रेन के ज़रिये में सेना के अग्रिम भण्डारण के लिए 753 मीट्रिक टन का सामान ले जाया गया जिसे सेना की विभिन्न यूनिटों और ठिकानों तक पहुंचाया गया। अपनी वापसी यात्रा में यही मालगाड़ी कश्मीरी सेब लेकर देश के दूसरे हिस्सों तक जाएगी। एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) और एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) में भारतीय सेना की कई ऐसी चौकियां हैं जो सर्दियों में पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाती हैं ।

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