“मानवता की रसोई” से फैल रही उम्मीद की खुशबू जहां सेवा बन गई है सबसे बड़ी पूजा : Jodhpur

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मानवता की रसोई — संवेदना की थाली और सेवा का स्वाद🌿

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में शुरू की गई “मानवता की रसोई” एक प्रेरणादायक पहल है, जहां रोज़ाना सैकड़ों ज़रूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सेवा कार्य के पीछे समाजसेवी निर्मल गहलोत, उनके भाई तरुण गहलोत और अदम्य चेतना ट्रस्ट की प्रेरणा जुड़ी है। “Joy of Giving” कार्यक्रम के तहत यह पहल केवल भोजन नहीं, बल्कि संवेदना, सहयोग और सेवा की मिसाल बन चुकी है।

हर कोई इस अभियान में भागीदार बन सकता है — अपने किसी प्रिय की याद में केवल ₹5100 का सहयोग देकर एक दिन की भोजनशाला का सेवा-दाता बनें। “मानवता की रसोई” वास्तव में यह संदेश देती है कि सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। शहर के शिक्षा ऋषि और प्रमुख भामाशाह भाई निर्मल गहलोत जी व तरुण गहलोत जी (Nirmal Gehlot Charitable Foundation) तथा अदम्य चेतना ट्रस्ट की प्रेरक पहल “मानवता की रसोई” के माध्यम से हर दिन सैकड़ों ज़रूरतमंद रोगियों और उनके परिजनों को निःशुल्क भोजन परोसा जा रहा है।

Times of India द्वारा आयोजित “Joy of Giving” कार्यक्रम में शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक, समाजसेवी और संवेदनशील जन इस सेवा उत्सव में शामिल हुए। मानवता की रसोई — संवेदना की थाली और सेवा का स्वाद यह तस्वीर उसी पल की है जब वातावरण में बस एक ही भावना थी “देना ही सबसे बड़ी पूजा है!”हार्दिक आभार विजेंद्र जी (Times of India) का, जिन्होंने इस पुण्यार्थ कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण बनाया।

मानवता की रसोई JoyOfGiving

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