आज विश्व हस्त प्रक्षालन यानी हाथ धुलाई दिवस भी है ….तो चलिए आज हम भी हाथ धोकर इस दिवस की एहमियत जानने की कोशिश करते हैं ….विश्व हस्त धुलाई दिवस हर बरस अक्टूबर माह की 15 तारिख को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य है लोगों में व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना है आज के दिन वैश्विक हाथ धुलाई दिवस के रूप मे मनाया जाता है। 2025 का थीम “स्वास्थ्य देखभाल गुणवत्ता और सुरक्षा जलवायु या संस्कृति” है जो साबुन और पानी से हाथ धोने को महत्व देता है
इस वर्ष मध्यप्रदेश में एक साथ 12 लाख 76 हजार 425 विद्यार्थियों द्वारा ‘विश्व हाथ धुलाई दिवस’ पर हाथ धोने के कीर्तिमान को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की मान्यता मिल गई है।

विश्व का पहला हाथ धुलाई दिवस 15 अक्टूबर 2008 को मनाया गया था….और इस दिन दुनिया के 70 देशों के 12 करोड़ बच्चों ने साबुन से अपने हाथ धोये थे .. ….इस आयोजन को सफल बनाने में सम्बंधित देशों की सरकारों , स्थानीय प्रशासन और सरकारी एवं ग़ैर सरकारी संस्थाओं ने सहयोग दिया था
इससे पहले हाथ धुलाई का यह विश्व रिकॉर्ड अर्जेंटीना, पेरू और मेक्सिको के नाम दर्ज हुआ था।

विशेषज्ञों के अनुसार अपने हाथों को स्वच्छ रखने की आदत से 3 में से 1 व्यक्ति डायरिया और 5 में से 1 व्यक्ति श्वास के संक्रमण से बाख सकता है…खाना खाने से पहले हाथों को साबुन या साफ़ पानी से ज़रूर धोना चाहिए….सहारे के लिए सीढ़ियों के किनारे लगी दीवार के पाइप , अनेक हाथों से होकर गुज़री करेंसी पर लोगों के हाथों का पसीना लगा होता है , कई बार लोग करेंसी को ऐसी जगहों पर रखते हैं जो सेहत के लिहाज से ठीक नहीं होतीं

विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस पर दुनिया भर में कई लोग आज भी हैं जो इनके प्रति जागरूक नहीं हैं। विश्व हाथ धुलाई दिवस का उद्देश्य इसी जागरूकता को समाज तक पहुंचाना है।

दरअसल यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का ही एक हिस्सा है। क्योंकि हाथ की धुलाई से बीमारियों से बचा जा सकता है, और यह बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक अच्छी पहल है। हर व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति इन छोटी-छोटी बातों के प्रति सजग होना चाहिए, ताकि हम एक स्वास्थ समाज का निर्माण कर सकें। कई लोगों के हाथों में खुजली या कोई अन्य त्वचा रोग होता है जिसका संक्रमण दूसरे व्यक्ति को हो सकता है इस लिए पुराने नोटों को भी इस्तेमाल के बाद हाथ ज़रुर धोने चाहिए .




