रायपुर, 06.02.2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्रतिपादित अनुभवात्मक अधिगम, कौशल विकास और छात्र-केन्द्रित शिक्षण की अवधारणा को साकार करते हुए शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के एम.एस.सी. रसायन शास्त्र चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान को वास्तविक वैज्ञानिक परिवेश में समझने और उसे व्यावहारिक कौशल में बदलने का अवसर प्रदान करना था।
छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के एम.एस.सी. रसायन शास्त्र विद्यार्थियों का राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण।
रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास ने इस अवसर पर कहा कि यह शैक्षणिक भ्रमण राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के ’अनुभवात्मक एवं कौशल-आधारित अधिगम’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि तार्किक सोच, समस्या-समाधान क्षमता, बहु-विषयक दृष्टिकोण और करियर के प्रति स्पष्टता भी विकसित करते हैं। डॉ. व्यास ने कहा कि वास्तविक प्रयोगशाला अनुभव से ही विज्ञान को गहराई से समझा जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला की संयुक्त संचालक ’’डॉ. शिखा तिवारी’’ ने किया।
भौतिक विज्ञान विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार साहू ने विद्यार्थियों को स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप और फ्लोरोसेंस ईडीएक्सआरएफ जैसे उपकरणों के माध्यम से पदार्थों की पहचान और धातुओं की शुद्धता की जांच की प्रक्रिया समझाई गई। बैलेस्टिक अनुभाग में ’’श्री अशोक कुमार’’ ने फायरिंग रेस्ट, वेलोसिटी डिटेक्टर और इंटीग्रेटेड बैलेस्टिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के माध्यम से गोली की गति, भेदन क्षमता और पहचान की व्यावहारिक प्रक्रिया समझाई।
विद्यार्थियों को प्रयोगशाला की संरचना, विभागों की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक परीक्षणों में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
रसायन एवं विषविज्ञान अनुभाग में ’’डॉ. कुलवीर सिंह’’ ने विभिन्न जैविक नमूनों का विश्लेषण कर विष की पहचान और मृत्यु के कारणों का निर्धारण करने की वैज्ञानिक विधि बताई। उन्होंने गैस क्रोमैटोग्राफी और द्रव्यमान स्पेक्ट्रोफोटोमीटर जैसे उन्नत उपकरणों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। जीव विज्ञान अनुभाग में ’’डॉ. एस. के. सिंह, डॉ. मौमिता चंद्राकर और डॉ. श्रीजॉय बनर्जी’’ ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की प्रक्रिया, इसकी न्यायिक महत्ता और पीसीआर, ऑटोमैटिक डीएनए एक्सट्रैक्टर एवं जेनेटिक एनालाइजर जैसे उपकरणों के प्रयोग को विद्यार्थियों को समझाया।
सीरोलॉजी विभाग में विद्यार्थियों ने रक्त, मिट्टी और अन्य नमूनों की जाँच के माध्यम से अपराध से जुड़े साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण देखा और उपकरणों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया।
रसायन शास्त्र विभाग की विभागीय रसायन परिषद प्रभारी एवं भ्रमण संयोजक श्रीमती अनुराधा चैधरी ने भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए प्रत्येक विभाग की कार्यप्रणाली और उपकरणों के उपयोग को समझाया। भ्रमण के उपरांत उन्होंने एक इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने अनुभव, अवलोकन और सीख साझा किए। इस सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक विज्ञान की व्यावहारिक उपयोगिता और आधुनिक तकनीकों पर अपने विचार व्यक्त किए। श्रीमती चैधरी ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें इन अनुभवों को भविष्य की शैक्षणिक और व्यावसायिक योजनाओं से जोड़ने हेतु प्रेरित किया।




डॉ. गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति।-2020 ‘अनुभवात्मक अधिगम’ पर जोर देती है और ऐसे अवसर विद्यार्थियों को उनके करियर के साथ-साथ समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार करते हैं।
समापन सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त संचालक ’’डॉ. एस. के. सिंह’’ ने कहा कि विज्ञान आज समाज में न्याय, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दक्षता के साथ नैतिक जिम्मेदारियों को अपनाने की सलाह दी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों में अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करते हैं, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। डॉ. गुप्ता ने इस शैक्षणिक भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत समृद्ध अनुभव बताते हुए प्रयोगशाला के अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भ्रमण केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता, टीम वर्क और वास्तविक जीवन की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुलझाने की क्षमता विकसित करते हैं।




