सूडान में अज्ञात बंदूकधारियों ने 70 से अधिक लोगों का किया बेरहमी से कत्ल

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FOURTH PILLARS UPDATE NEWS RAIPUR CHATTISGADH 30.03.2026

सूडान में सोने की खदान को लेकर हुए विवाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने 70 से अधिक लोगों की हत्या कर दी है।पुलिस के एक प्रवक्ता ने सोमवार को पुष्टि करते हुए बताया कि दक्षिण सूडान में राजधानी के बाहरी इलाके में सोने की खदान को लेकर हुए विवाद में बंदूकधारियों ने 70 से अधिक लोगों की हत्या कर दी है। खुले मैदान में पड़े दर्जनों शवों का एक वीडियो ऑनलाइन शेयर किया गया है। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि माना जा रहा है कि कई अन्य पीड़ित झाड़ियों में भाग गए हैं।

सेंट्रल इक्वेटोरिया राज्य में जेबेल इराक स्थित सोने की खदान का इलाका पहले भी अवैध खनिकों और खनन कंपनियों के बीच हिंसक झड़पों का गवाह रहा है।

विपक्ष की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “जेबेल इराक एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जो पूरी तरह से SSPDF के विशेष नियंत्रण में है।

पुलिस प्रवक्ता क्वासीज्वोक डोमिनिक अमोंडोक ने कहा, “मुझे बस इतना पता है कि अज्ञात बंदूकधारियों ने जेबेल इराक में सोने की खदान पर हमला किया। इसमें 70 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं।” सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी – इन अपोजिशन, या SPLM/A-IO ने इस हमले की निंदा करते हुए इसके लिए सरकारी बलों, जिन्हें SSPDF के नाम से जाना जाता है को दोषी ठहराया है।

इस नरसंहार की पूरी जिम्मेदारी SSPDF बलों की है, जो इस क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं।”

एक स्थानीय नागरिक अधिकार समूह, ‘नाइल इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड ट्रांजिशनल जस्टिस’ ने इस हमले की निंदा की और संसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों में प्रभावी शासन और निगरानी की मांग की। ‘नाइल इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड ट्रांजिशनल जस्टिस’ ने एक बयान में लिखा, “यह भयानक कृत्य जीवन के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है और उन क्षेत्रों में नागरिकों की लगातार बनी रहने वाली असुरक्षा को उजागर करता है, जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और संसाधनों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है।” मानवाधिकार कार्यकर्ता एडमंड याकानी ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वो प्राकृतिक संसाधनों के लिए समुदायों के बीच बढ़ती दुश्मनी पर ध्यान दें। उन्होंने कहा,

“मेरी सरकार से अपील है कि वह हस्तक्षेप करे और पूरे देश में अवैध सोने के खनन की इस संस्कृति को रोके।”

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