धर्मेन्द्र के ‘फौजी रूप’, पर्दे का हर फ्रेम असली जवान की तरह जीया..

Spread the love

धर्मेन्द्र ने ‘हक़ीक़त’, ‘सोल्जर ठाकुर दलेर सिंह’, ‘ललकार’, ‘फौजी’ और ‘इक्कीस’ में सैनिक किरदारों को ईमान, हिम्मत और देशभक्ति के साथ अमर बना दिया है.

आज धर्मेन्द्र जी हमारे बीच नहीं रहे. लेकिन भारतीय सिनेमा में उनके निभाए किरदार – खासकर भारतीय सैनिक के रूप में – हमेशा जिंदा रहेंगे. पर्दे पर जब भी उन्होंने वर्दी पहनी, दर्शकों को लगा मानो कोई असली जवान हमारे सामने खड़ा है. धर्मेन्द्र सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं थे, वे हिम्मत, ईमान और देशभक्ति की पहचान थे. चलिए याद करते हैं वो फिल्में, जहाँ उन्होंने भारतीय सेना के बेटे बनकर राष्ट्र को सलाम किया.

धर्मेन्द्र की फिल्म ‘हक़ीक़त’ (1964) में निभाई गई कैप्टन बहादुर सिंह की भूमिका उनके करियर का सबसे सच्चा और भावनात्मक सैनिक किरदार मानी जाती है. 1962 के भारत–चीन युद्ध पर आधारित इस फिल्म में धर्मेन्द्र एक युवा, ईमानदार और बेहद संवेदनशील अफसर के रूप में सामने आते हैं, जो बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों में फंसी अपनी छोटी टुकड़ी का न सिर्फ नेतृत्व करता है, बल्कि उनके मनोबल को भी थामे रखता है.

ख, ठंड, मौत का डर और दुश्मन की घेराबंदी—इन सबके बीच कैप्टन बहादुर सिंह अपने सैनिकों के लिए हिम्मत और उम्मीद का सबसे बड़ा सहारा बनता है. धर्मेन्द्र ने इस किरदार में दर्द, जिम्मेदारी, प्रेम और कर्तव्य का ऐसा संतुलन दिखाया कि उनके चेहरे पर थकान भी असली लगती है और हिम्मत भी. प्रिया राजवंश के साथ उनकी सरल प्रेम कहानी इस युद्ध-त्रासदी को और भी मार्मिक बनाती है, और अंत में उनका बलिदान दर्शकों के दिल में आज भी एक टीस छोड़ जाता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *