“रसायन विज्ञान केवल विषय नहीं, जीवन को देखने की दृष्टि है” प्राचार्य डॉ. गुप्ता

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रायपुर दिनांक 04 अक्टूबर 2025 FOURTHPILLARSNEWS

शासकीय जे. योगानंदम् छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा एम.एससी. प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम एवं विभागीय रसायन परिषद के गठन का आयोजन महाविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता के स्वागत से हुई। इसके पश्चात डॉ. व्यास ने अपने विस्तृत उद्घाटन भाषण में रसायन विज्ञान की बदलती भूमिका, शोध एवं नवाचार के महत्व, और इस क्षेत्र में उभरते अवसरों पर विस्तृत चर्चा की।

विभाग विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि शोध, प्रस्तुतीकरण कौशल और नेतृत्व में भी सक्षम बनाने हेतु संकल्पित है।

रसायन शास्त्र केवल एक विषय नहीं, बल्कि यह जीवन की हर परत को छूने वाली विज्ञान की एक ऐसी शाखा है जो समाज, उद्योग, चिकित्सा, पर्यावरण और तकनीकी विकास से गहराई से जुड़ी है।

डॉ. व्यास ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की संरचना, प्रयोगशाला में अनुसंधान की विधियां, मूल्यांकन की प्रणाली तथा प्रोजेक्ट कार्य की प्रक्रिया से भी अवगत कराया। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि शोध, प्रस्तुतीकरण कौशल और नेतृत्व में भी सक्षम बनाने हेतु संकल्पित है।

छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में परिचय कार्यक्रम एवं विभागीय रसायन परिषद के गठन का आयोजन

रसायन विज्ञान की समझ न केवल प्रयोगशाला तक सीमित है, बल्कि यह एक सोच है, एक दृष्टिकोण है जिससे हम जीवन और प्रकृति को नई दृष्टि से देख सकते हैं।

इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक ऐसा व्यक्तित्व निर्माण करना है जो समाज के प्रति उत्तरदायी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संपन्न और नवाचार में अग्रणी हो। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान की समझ न केवल प्रयोगशाला तक सीमित है, बल्कि यह एक सोच है, एक दृष्टिकोण है जिससे हम जीवन और प्रकृति को नई दृष्टि से देख सकते हैं।

डॉ. गुप्ता ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों को आत्मसात करें, स्व-अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित करें और रिसर्च के माध्यम से नवाचार की दिशा में कार्य करें।

उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में उपयोगी पदार्थों से संबंधित रिसर्च की बात पर जोर देते हुए कहा कि निकट भविष्य में इसकी नितांत आवश्यकता होगी। इसके पश्चात विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. यामिनी ठाकुर ने अनुसंधान के महत्व, प्रयोगशाला कार्य की प्रासंगिकता तथा नवोदित शोधकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शोध केवल परिणाम नहीं, बल्कि एक सोचने की प्रक्रिया है, जो किसी भी विद्यार्थी को गहराई से सोचने और वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान खोजने की दिशा में प्रेरित करती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और आत्मविकास को शिक्षा के समानांतर लक्ष्य के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी।

इसके बाद डॉ. रेखा सोनी, डॉ. विभा तिवारी, डॉ. भारती एम. पारधी, एवं डॉ. निशा छेत्री ने रसायन विज्ञान की विविध शाखाओं, समकालीन वैज्ञानिक उपलब्धियों और करियर विकल्पों की जानकारी साझा की।

विभागीय रसायन परिषद की संयोजक डॉ. यामिनी ठाकुर ने विभागीय रसायन परिषद का औपचारिक गठन के बारें में बताया। डॉ. यामिनी ठाकुर ने इस परिषद की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करना, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी को बढ़ाना, और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना है। परिषद के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा की गई, जिसके पश्चात सभी विद्यार्थियों ने मंच पर आकर अपना परिचय दिया और अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन का संकल्प लिया। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने विभागीय शिक्षकों से पाठ्यक्रम, शोध, परीक्षाओं और करियर से जुड़े प्रश्न पूछे। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक एवं उपयोगी सिद्ध हुआ, जिससे विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक यात्रा को लेकर स्पष्ट दिशा प्राप्त हुई।

कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन, संकाय सदस्यों, छात्र-छात्राओं और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को रचनात्मकता, प्रतिबद्धता और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए न केवल एक औपचारिक आरंभ था, बल्कि एक प्रेरक अनुभव भी, जिसने उन्हें आत्मविश्वास, जागरूकता और रसायन विज्ञान के प्रति नई दृष्टि प्रदान की।

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