Banaras Lit Fest की जानिब से एक ख़ास-व-हसीन शाम, मुंबई की सरज़मीं पर गूंजी बनारस की रूहानी आवाजें “गोया मुंबई में बनारस देखा”
मुंबई विश्वविद्यालय के फिरोज़शाह मेहता सभागार में बनारस लिटरेचर फेस्टिवल 2025 साहित्यिक समागम का भव्य उद्घाटन एवं सफल आयोजन हुआ। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में साहित्यिक प्रेमीयों ने अपनी रूचि दिखाते हुए लोग उपस्थित रहे।
संस्कृति मंत्री अशोक (आशीष) शेलार ने कहा कि, बनारस भारतीय सभ्यता का केंद्र रहा है और इस लिट्फेस्ट के माध्यम से नए साहित्यिक इतिहास का सृजन हो रहा है जो वाकई काबिले तारीफ़ है।

इस साहित्यिक समागम में देश के प्रमुख साहित्यकार, लेखक और विद्वान एक मंच पर एकत्र हुए, जिसका उद्देश्य साहित्यिक नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर वक्ताओं ने साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे संस्कृति और सभ्यता का दर्पण बताया। वक्ताओं ने ये भी कहा कि बनारस लिट्फेस्ट ने कम समय में अपनी अनूठी पहचान बनाई है, और यह आयोजन विश्व में साहित्य, कला, संगीत और आध्यात्म की भारतीय परंपरा को सशक्त करेगा।
साहित्यिक विरासत का सम्मान करते हुए कहा वक्ताओं ने कहा कि यह नगरी आधुनिक हिंदी की जन्मस्थली रही है।

महाराष्ट्र सरकार के आईटी एवं संस्कृति मंत्री अशोक (आशीष) शेलार ने शुभकामनाएँ दीं और अगले सत्र में बनारस आकर शामिल होने का आश्वासन दिया। आयोजकों ने इसे साहित्य प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक मंच बताया, जहां साहित्य, संस्कृति और समाज से जुड़े विविध विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है। बनारस लिट्फेस्ट के तहत कविता पाठ, कहानी पाठ, नाटक पाठ और साहित्यिक विचार-विमर्श जैसे विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिससे साहित्य प्रेमियों को देश के दिग्गज साहित्यकारों से संवाद करने का सुनहरा अवसर मिला।
लेखिकाओं मंजू लोढ़ा और गीता सिंह ने समाज और साहित्य के रिश्ते व महिला लेखन पर अपने विचार साझा किए.
राही मासूम रज़ा जन्मशती परिचर्चा में विभूति नारायण राय व डॉ. रविन्द्र कात्यान ने रज़ा के साहित्य पर प्रकाश डाला। कवि सम्मेलन में आकृति विज्ञा अर्पण, दीक्षित दनकौरी, मदन मोहन दानिश, असलम हसन, श्लेष गौतम, संतोष सिंह, दानबहादुर सिंह और अभिषेक तिवारी की प्रस्तुतियाँ हुईं..।
तो वहीं संतोष सिंह के कविता संग्रह “तो क्या होगा” का लोकार्पण। बृजेश सिंह, संस्थापक, ने मुंबई और बनारस की सांस्कृतिक एकता पर बल दिया।
संगीत सत्र में सतीश मिश्रा, संजय सिंह, दिलीप सेन, दीपा नारायण और सोमंका भट्टाचार्य की प्रस्तुतियाँ।
आयोजन साहित्य, संगीत और संस्कृति का अनूठा संगम बना। श्रोताओं की उत्साही भागीदारी से स्पष्ट हुआ कि महानगरों में भी साहित्य और कला के प्रति गहरी रुचि बनी हुई है। यह सत्र इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि बनारस लिटरेचर फेस्टिवल अब बनारस तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का सेतु बन रहा है।





