एम्स ने बताई सर्दियों में मौत की वजह

Spread the love

कंपकंपाती ठंड, धुंध में लिपटी सड़कें, अलाव के पास सिमटे लोग और एंबुलेंस का सायरन, ये इस बार की सर्दी का खौफनाक सच है। आज 16 जनवरी 2026 है और पारा हदें तोड़ चुका है। 2–3 डिग्री तक गिरावट दिल्ली का सफदरजंग 3 डिग्री, पालम 2, गुरुग्राम 0.8, हिसार 0.2 डिग्री, हालात ऐसे कि शिमला भी पीछे छूट गया और जब ठंड इतनी बेरहम हो जाए। तो हर घर, हर दफ्तर, हर गाड़ी में एक ही सहारा दिखता है हीटर, ब्लोअर, अंगीठी।

लेकिन सवाल ये है जो ये आग और गर्म हवा राहत दे रही है कहीं वही चुपचाप ज़िंदगी के लिए जानलेवा खतरा तो नहीं बन रही ?

मौसम विभाग भी इसे इमरजेंसी मान रहा है। IMD ने शीतलहर का ‘येलो और ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।

North-Western से आने वाली शुष्क हवाएं पहाड़ों पर बर्फबारी और रेडिएशन कूलिंग अगले 2-3 दिन तक कड़ाके की ठंड का साफ सिग्नल है।

ऊपर से कोहरा, खराब AQI यानि सांसों पर भी डबल अटैक और इसी डर से लोग कमरे सील कर लेते हैं। दरवाजे-खिड़कियां बंद और हीटर पूरी रात ऑन रखते हैं। और फिर यहीं से शुरू होता है असली खतरा डॉक्टर्स इसे कहते हैं ‘साइलेंट किलर’। कार्बन मोनोऑक्साइड..जिसका ना रंग है, ना गंध, ना स्वाद। पता ही नहीं चलता और जब तक समझ आए बहुत देर हो चुकी होती है। हीटर बंद कमरे में ऑक्सीजन खा जाते हैं। जहरीली गैस भर जाती है। पहले चक्कर, सिरदर्द , थकान, फिर बेहोशी और फिर जान चली जाती है।

हीटर जानलेवा हो सकता है अगर ज़्यादा इस्तमाल करें

AIIMS के 15 साल के डेटा के मुताबिक ”95% कार्बन मोनोऑक्साइड से मौत सर्दियों में होती हैं”। खासतौर पर अंगीठी और ब्रेजियर की वजह से और ये खतरा हर साल की हकीकत है।

बिहार के छपरा में तीन मासूम और एक बुजुर्ग, पंजाब के तरन-तारन में दंपति और नवजात। दिल्ली के मुकुंदपुर में पूरा परिवार, कहीं सेफोकेशन, कहीं आग, कहीं शॉर्ट सर्किट, ठंड से बचने की कोशिश ने जिंदगी ही छीन ली। ऐसे में सावधानी बरतने की जरुरत है। कमरे में हवा का रास्ता खुला रखें, रात भर हीटर या अंगीठी ना जलाएं, पानी का बर्तन रखें ताकि नमी बनी रहे। ‘CO डिटेक्टर’ जरूर लगाएं ताकि बॉडी टेम्परेचर मेंटेन रखने में कोई गलती ना हो। क्योंकि ये प्रचंड ठंड बीमार बना रही है। सर्दी में सांस की नलियां सिकुड़ती हैं। खांसी, बलगम, सांस फूलना..अस्थमा, COPD, ब्रोंकाइटिस। यहां तक कि निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। हर साल सर्दियों में सांस से जुड़ी बीमारी ‘25% तक बढ़ जाती हैं’। बच्चों में क्लेम्स 41% तक उछल जाते हैं। तो याद रखिए इस ठंड में लड़ाई सिर्फ तापमान से नहीं है, लड़ाई ‘लापरवाही’ से भी है।

गर्मी चाहिए, लेकिन समझदारी के साथ, सर्दी से बचाव चाहिए, लेकिन जिंदगी को दांव पर रखकर नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *