समय की बिसात पर नक्षत्रों की चाल के जानकार हैं आचार्य भंवरलाल पुरोहित.

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मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली साहब का शेर है
“हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,
जिस को भी देखना हो कई बार देखना।”

Fourth pillars update news portal 13.09.2026

रायपुर के अवन्ती विहार निवासी आकर्षक व्यक्तित्व के धनी , विनम्र , मिलनसार , व्यवहार कुशल , वैदिक कुंडली विज्ञान के गहन जानकार आचार्य श्री भंवरलाल पुरोहित जी की शख्सियत भी ऐसी ही है उनके भीतर एक ज्योतिषी के अलावा एक फ़ोटोग्राफ़र , एक साहित्य और संगीत प्रेमी और एक बेहतरीन इंसान है | एक ज्योतिष होने के नाते वो एक आदमी के भीतर मौजूद कई आदमियों को पह्चानने के काम में भी माहिर हैं | 4th पिलर्स वेब पोर्टल के लिए उनसे बात की चैनल प्रमुख शीरीन सिद्दीक़ी ने पुरोहित जी ने अपने बारे में बताया| भारतीय स्टेट बैंक में अधिकारी के रूप में अपनी सेवायें देने के बाद श्री भंवरलाल अब सेवा निवृत्ति का आनंद उठा रहें हैं | उनका ताल्लुक मिठाईयों और नमकीन के लिए मशहूर बीकानेर से है जो उनका जन्म स्थान है |

भंवरलाल पुरोहित का विस्तार से लिया गया इंटरव्यूऔर जानिए जन्म कुंडली का महत्व: व्यक्ति के जन्म के समय और स्थान के आधार पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति क्या होती है यह हमारे जीवन का वास्तविक नक्शा कैसे खींचती है।

बकौल भंवरलाल जी मेरे नामकरण के पीछे एक दिलचस्प रस्म है |

असल में राजस्थान में अभी भी यह रिवाज है कि , अगर किसी परिवार में दादा के जीवित रहते कोई संतान होती है तो चाहे वो लड़का हो या लड़की उसका नाम भंवर या भंवरी रखा जाता है इसलिए मेरा नाम भी भंवरलाल रखा गया , मेरे पिता अपनी उम्र के १२ वर्ष में ही भाटपारा आ गए थे , और इस तरह मैं बीकानेर से भाटापारा आया ।मेरी पूरी शिक्षा सामान्य तौर पर भाटापारा में हुई मैंने कॉमर्स में स्नातक किया और बीकॉम करने के दौरान ही मैंने बैंक की नौकरी के लिए एग्जाम देना शुरू कर दिया था | मेरा सिलेक्शन स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में होने के साथ-साथ दो और बैंकों में हो गया था किंतु मैंने स्टेट बैंक को ज्वाइन किया |

जहाँ तक ज्योतिष में मेरी रुचि का प्रश्न है पढ़ने के शौक के चलते कुछ ऐसी किताबें मेरे हाथ लगीं जिनमें हस्त रेखाओं की बहुत अच्छी जानकारी दी गयी थी | उन दिनों मेरे एक-दो मित्र हुआ करते थे जिनके साथ इस विषय पर विचार विमर्श हुआ करता था |

भंवरलाल जी बताते हैं कि, राशिचक्र , आकाश में फैले 12 नक्षत्रों का एक घेरा है, जिसके माध्यम से सूर्य , चंद्रमा और पृथ्वी से दिखाई देने वाले ग्रह गति करते हैं।

सिर्फ यह जानने के लिए कि हस्त रेखा विज्ञान के बारे में हमारी जानकारी कितना प्रबल है हम लोगों की हस्त रेखाओं का अध्ययन किया करते थे | समय के साथ-साथ हस्त रेखा की बारीकियां और मर्यादाएं भी समझ में आने लगीं | कालांतर में मुझे यह अनुभव हुआ कि , हस्त रेखा का ज्ञान अस्थायी है और वैदिक ज्योतिष का ज्ञान बेहद पुख्ता और भरोसे मंद है । हमारे गुरु जी कहा करते थे कि , बिना ईश्वर की कृपा के ज्योतिष का ज्ञान संभव नहीं है और यह एक गूढ़ ज्ञान है । बैंक की नौकरी में इतना समय नहीं मिल पाता था कि किसी और विधा में हम रुचि लें साथ ही साथ जब मैंने बैंक में नौकरी की शुरुआत की तो उसी दौरान मुझे फोटोग्राफी का भी शौक लग गया था और नौकरी करते-करते मैंने फोटो खींचना शुरू कर दिया था |

आपने बताया कि, नौकरी के दौरान मैंने मित्रों की शादियों में भी फोटो खींची उसे समय में तो इज्जत मिला करती थी , बड़ा अच्छा लगता था

मेरा ज्योतिष का शौक भी इसी तरह से चलता रहा फिर जब बैंक में आया अलग-अलग जगह पर मैंने नौकरी की नई-नई जगह में जाने के साथ-साथ अपने फ़ोटोग्राफ़ी के हुनर को भी आज़माना शुरू किया| बैंक की हाउस मैगज़ीन्स में मेरी खींची कई तस्वीरें प्रकाशित हुआ करती थीं और उन दिनों जो प्रतियोगिताएं होती थीं उनमें मुझे अक्सर मेरे द्वारा खींची गयी फ़ोटो को प्रथम पुरस्कार मिला करता था | जब मेरी पोस्टिंग भोपाल में हुई तो उसी दौरान मुझे ज्योतिष के एक अच्छे जानकार मिले श्री एम एस श्रीवास्तव जो उस समय भोपाल में बेहद प्रसिद्ध थे , मैं जब उनके संपर्क में आया तो मैंने उन्हें सबसे पहले अपनी कुंडली दिखाइ और उन्होंने मुझे प्रभावित किया इस तरह से मैं उनसे जुड़ा|

| के एक ग्रुप से जुड़ा जिसमें उन दिनों लगभग 50 से 60 ज्योतिषी थे , वो ग्रूप आज भी सक्रिय है और उसका नाम है “ज्योतिष विचार मंच”

फ़ोटोग्राफ़ी के हुनर को भी आज़माना शुरू किया| बैंक की हाउस मैगज़ीन्स में मेरी खींची कई तस्वीरें प्रकाशित हुआ करती थीं और उन दिनों जो प्रतियोगिताएं होती थीं उनमें मुझे अक्सर मेरे द्वारा खींची गयी फ़ोटो को प्रथम पुरस्कार मिला करता था |

प्रमुख मान्यताएं खगोलीय पिंडों का प्रभाव: सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति का सीधा असर पृथ्वी और इंसानों पर पड़ता है।

भोपाल में हम मासिक बैठक करके ज्ञान को साझा किया करते थे | ज्योतिष शास्त्र में मेरे गुरु श्री एम एस श्रीवास्तव भोपाल के वल्लभ भवन से डिप्टी डायरेक्टर के पद से रिटायर्ड हुए और उनका मानना था कि अनुभव और ज्ञान ज्योतिष के हिसाब से ज़रूरी होता है | वह ज्ञान सबके साथ साझा करते थे और सभी सदस्यों का ज्ञान बढ़ाने में मदद करते थे । मासिक बैठक अक्सर रविवार को होती थी और हम उसमें नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते थे

धीरे-धीरे श्रीवास्तव साहब से निकटता बढ़ी , उन्होंने मुझे ज्योतिष विचार मंच भोपाल का अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया मैं लगभग दो से ढाई साल तक विचार मंच का अध्यक्ष रहा , अपने कार्यकाल में हमने संस्कृत विद्यालय भोपाल के परिसर में एक बहुत अच्छा ज्योतिष सम्मेलन आयोजित किया था जिसमें भारतवर्ष के बड़े-बड़े शहरों से अच्छे-अच्छे ज्योतिषी पधारे थे वह एक सफल कार्यक्रम रहा , इसी दौरान मैं केंद्रीय संस्कृत विद्यालय भोपाल के आचार्यों के संपर्क में आया वहां मुझे पता चला कि ज्योतिष का एक कोर्स होता है मैंने वो कोर्स करने का निर्णय लिया |

एक मक़सद था और मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय था और इस तरह ज्योतिष और वास्तु पर केन्द्रित एक डिप्लोमा मैंने पास किया | डिप्लोमा लेने के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा |

इंदिरा गांधी ओपन नेशनल यूनिवर्सिटी यानी इग्नू के डिप्टी डायरेक्टर श्री अंशुमन उपाध्याय की प्रेरणा से मैंने इग्नू से ज्योतिष में एमए की उपाधि हासिल की | मेरा मुख्य उद्देश्य है अपना भविष्य जानने के जिज्ञासु लोगों को सही सलाह देना , उनके साथ किसी प्रकार की कोई बेईमानी ना हो | उनके जीवन की दिशा ठीक हो इसी उद्देश्य से मैं ज्योतिष के माध्यम से उनका उचित मार्गदर्शन करता हूँ और उनके जीवन के व्यवधानों को दूर करने के लिए जो भी उपाय किये जा सकते हैं उनकी उचित सलाह देता हूँ |

मैं ज्योतिष के अपने ज्ञान के माध्यम से पीड़ित मानवता की सेवा करना चाहता हूँ और यही कर रहा हूँ । मुख्य मुख्य रूप से वैदिक ज्योतिष में मेरी ज्यादा रुचि है और मैं उसी की पढ़ाई करता आ रहा हूं

फ़ोटोग्राफ़ी के हुनर को भी आज़माना शुरू किया| बैंक की हाउस मैगज़ीन्स में मेरी खींची कई तस्वीरें प्रकाशित हुआ करती थीं और उन दिनों जो प्रतियोगिताएं होती थीं उनमें मुझे अक्सर मेरे द्वारा खींची गयी फ़ोटो को प्रथम पुरस्कार मिला करता था | जीवन और उच्च विचार का दर्शन अपनाएँ |

अपने गुरु एम एस श्रीवास्तव जी के बाद मैं अनेक ऐसे आचार्यों के संपर्क में आया जिन्होंने वैदिक ज्योतिष की शिक्षा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से प्राप्त की है.

मैं उनके संपर्क में रहकर लगातार उनसे विचार विमर्श करता रहता हूँ और अपने ज्ञान में वृद्धि करता रहता हूं! मेरे पास ज्योतिष के बहुत सारे ग्रंथ है कुछ कुछ नए भी हैं इनकी गिनती लगाना मुश्किल है लेकिन हां मुख्य ग्रंथों के रूप में वृहत पाराशर होरा शास्त्र , सर्वार्थ चिंतामणि , जातक तत्व , बृहद जातक और नक्षत्र फल हैं | कुछ ज्योतिषी जो नए हैं उनके द्वारा लिखी गई किताबें भी हैं | क्योंकि मेरी पढ़ाई का आधार संस्कृत विद्यालय रहा है तो मैंने शास्त्रोक्त पढ़ाई की है और उसके आधार पर जो फलित कहा है वो पूर्णतः सही सिद्ध हुआ है

वो घटना लगभग 2 साल पहले की है जब मैं भोपाल में था तो एक सज्जन ने फोन किया ..किसी के माध्यम से मेरा नंबर लिया |उनकी एक बेटी है , जिसके विवाह को लगभग 5 वर्ष हो गए थे और संतान की समस्या थी, और संतान हेतु बेटी की कुंडली के साथ-साथ उसके पति की भी कुंडली देखी मुझे लगा कि कुछ उपाय करने से दंपति को संतान की प्राप्ति हो सकती है उपाय सुझाए गए और 6 से 8 महीने के भीतर उस बच्ची के पिता ने खुशखबरी दी कि उनकी बेटी को संतान होने वाली है , आज उस युवती का बेटा 1 साल से ज्यादा का है | उस बच्ची ने अपने बहुत अच्छे-अच्छे उद्गारों से मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे धन्यवाद दिया…उसके बाद अन्य कई लोगों के लिए भविष्य कथन किया जो सही साबित हुआ |

हमारे वो दर्शक और पाठक जो कुंडली विज्ञान के गहन जानकार आचार्य श्री भंवरलाल पुरोहित जी से संपर्क कर अपने , अपने परिवार अथवा मित्रों के लिए ज्योतिष मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो उनसे दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं | नंबर है : 9826157151,


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