राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरित प्रायोगिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक शिक्षा को करता है सशक्त: डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता

Spread the love

शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के रसायन शास्त्र विभाग के एम.एससी. चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों हेतु पाँच दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी 2026 तक सिद्धाचलम लैबोरेटरी, बीरगांव, रायपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना, जल एवं रासायनिक विश्लेषण का प्रशिक्षण देना तथा प्रयोगशाला नैतिकता एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था, जिससे वे शोध एवं उद्योग से जुड़ी आवश्यक दक्षताओं को विकसित कर सकें।

रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि यह इंटर्नशिप विद्यार्थियों के लिए कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक प्रयोगशाला कार्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।

पाँच दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के तकनीकी कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा आधुनिक प्रयोगशाला पद्धतियों की समझ को बढ़ाते हैं, जिससे वे शोध, उद्योग एवं पर्यावरणीय निगरानी जैसे क्षेत्रों के लिए बेहतर रूप से तैयार होते हैं। डॉ. व्यास ने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित अनुशासन एवं समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रयोगशाला उपकरणों एवं तकनीकों के निरंतर अभ्यास से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे शोध कार्य के लिए अधिक सक्षम बनते हैं।

विद्यार्थियों को नवाचारी वैज्ञानिक परियोजनाओं में रुचि लेने तथा अपने कौशल का उपयोग पर्यावरणीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों में करने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी एवं जिज्ञासा की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत व्यावहारिक प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का प्रशिक्षण विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, समस्या-समाधान कौशल तथा वैज्ञानिक सोच को मजबूत करता है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगशाला कार्य में अनुशासन, टीमवर्क एवं निरंतर सीखने की भावना विकसित करने की प्रेरणा दी। डॉ. भावना जैन ने विद्यार्थियों को इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर बधाई दी और प्रयोगशाला नैतिकता, सुरक्षा मानकों तथा प्रयोगों में सटीकता के महत्व पर प्रकाश डाला।

विद्यार्थियों को उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों को सीखने एवं शोधोन्मुख अध्ययन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को जल गुणवत्ता से संबंधित प्रमुख परीक्षणों जैसे चभ्, टर्बिडिटी, हार्डनेस, अवशिष्ट क्लोरीन, ठव्क्ए ब्व्क् तथा धातु आयन विश्लेषण का विस्तृत व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही नैनोमैटीरियल संश्लेषण की मूल अवधारणाओं से भी परिचय कराया गया। प्रथम दिवस कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी गई तथा यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर एवं फ्लेम फोटोमीटर का प्रदर्शन किया गया। द्वितीय एवं तृतीय दिवस BOD, COD तथा जल कठोरता विश्लेषण पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें ऑटोक्लेव, मफल फर्नेस, हॉट एयर ओवन, वैक्यूम ओवन, टर्बिडिटी मीटर, आयन सेलेक्टिव मीटर, कंडक्टिविटी मीटर, चभ् मीटर, सोनिकेटर, सेंट्रीफ्यूज, मैग्नेटिक स्टिरर एवं यूवी कैबिनेट जैसे उपकरणों का प्रयोग कराया गया। चतुर्थ दिवस यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री के अंतर्गत लौह, नाइट्रेट एवं सल्फेट के मात्रात्मक परीक्षण, कैलिब्रेशन तथा आंकड़ों की व्याख्या पर कार्य कराया गया।

पाँचवें एवं अंतिम दिवस विद्यार्थियों ने ठव्क् विश्लेषण तथा फ्लेम फोटोमीटर द्वारा सल्फेट, सोडियम एवं पोटैशियम का कैलिब्रेशन किया, जिससे सप्ताह भर में सीखी गई तकनीकों का पुनरावलोकन हुआ।

तकनीकी सत्र के अंतर्गत डॉ. योगिता साहू, वैज्ञानिक अधिकारी, राज्य फॉरेंसिक प्रयोगशाला, रायपुर द्वारा फॉरेंसिक विज्ञान की मूल बातें विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया गया। उन्होंने फॉरेंसिक जांच में वैज्ञानिक सटीकता, प्रमाणिकता एवं नैतिक जिम्मेदारी की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को विधिक एवं अन्वेषणात्मक क्षेत्रों में रसायन विज्ञान के महत्व से अवगत कराया।


कार्यक्रम के समापन पर डॉ. व्यास ने प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता, डॉ. भावना जैन तथा समस्त प्राध्यापकों श्रीमती अनुराधा चैधरी, डॉ. यामिनी ठाकुर, डॉ. विभा तिवारी, डॉ. रेखा सोनी, डॉ. निशा छेत्री एवं डॉ. भारती मनीष पारधी के प्रति उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सिद्धाचलम लैबोरेटरी के स्टाफ सदस्यों दिव्या साहू, टेकश्वरि साहू, कपिल साहू, अभय पटेल एवं अन्य सभी सहयोगियों के योगदान की भी सराहना की। अंत में विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। समग्र रूप से यह पाँच दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम ’’एनईपी के उद्देश्यों के अनुरूप पूर्णतः सफल’’ रहा, जिसने विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं व्यावसायिक आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया तथा उन्हें भविष्य की शैक्षणिक, शोध एवं पेशेवर चुनौतियों के लिए तैयार किया।

(डाॅ. तपेश चंद्र गुप्ता ) प्राचार्य


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *