FOURTH PILLARS NEWS 20-01-2026
रायपुर, 20 जनवरी 2026 एम.एस.सी. चौथे सेमेस्टर रसायन शास्त्र के विद्यार्थियों के लिए चल रहे पाँच दिवसीय इंटर्नशिप प्रोग्राम (19-23 जनवरी 2026) के दूसरे दिन, रसायन विज्ञान विभाग, ’’शासकीय जे. योगानन्दम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर’’ के विद्यार्थियों को ’’सिद्धाचलम प्रयोगशाला, बिरगांव, रायपुर’’ में गहन प्रायोगिक प्रशिक्षण और प्रयोगशाला अनुभव प्रदान किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं का अनुभव विद्यार्थियों और वास्तविक वैज्ञानिक कार्यों के बीच सेतु का काम करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को ’’मानक संचालन प्रक्रियाओं, प्रयोगशाला आचार संहिता और सुरक्षा नियमों’’ को समझने में मदद करते हैं,
पाँच दिवसीय रसायन विज्ञान इंटर्नशिप प्रोग्राम का दूसरा दिन सफलतापूर्वक सम्पन्न

विभागाध्यक्ष रसायन विज्ञान, डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि इंटर्नशिप का दूसरा दिन ’’जल गुणवत्ता मूल्यांकन’’ में प्रायोगिक प्रशिक्षण पर केंद्रित था, जिसमें विशेष रूप से ’’बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड ’’ और ’’केमिकल ऑक्सीजन डिमांड’’ पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि ये पैरामीटर जल प्रदूषण और पर्यावरण सुरक्षा का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को ’’युवी डाइजेस्टर और डिस्टिलेशन यूनिट’’ जैसे उपकरणों पर प्रशिक्षण दिया गया, जो पर्यावरण और विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
अनुसंधान, उद्योग और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं में करियर के लिए आवश्यक हैं।

डॉ. भावना जैन, निदेशक और मुख्य वैज्ञानिक, सिद्धाचलम प्रयोगशाला के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने ’’थर्मल प्रयोगशाला’’ का दौरा किया, जहां उन्होंने ’’हॉट प्लेट, ऑटोक्लेव, मफल फर्नेस, वैक्यूम ओवन और हॉट एयर ओवन’’ सहित उपकरणों के कार्य और उनके अनुप्रयोग देखे। इसके अतिरिक्त, ’’मेल्ट फ्लो इंडिकेटर और फ्लेम फोटोमीटर’’ जैसे उन्नत उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया, जो रसायन और सामग्री विश्लेषण में महत्वपूर्ण हैं।
विद्यार्थियों ने ’’रासायनिक प्रयोगशाला’’ का भी विस्तृत दौरा किया, जहां उन्हें आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों जैसे ’’यूवी कैबिनेट, आयन चयनात्मक मीटर, टर्बिडिटी मीटर, कंडक्टिविटी मीटर, पीएच मीटर, मैग्नेटिक स्टिरर, सोनिकेटर, सेंट्रीफ्यूज और यूवी-विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर’’ से परिचित कराया गया। इन उपकरणों के कार्य सिद्धांत और अनुसंधान तथा उद्योग में उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया।
कुल मिलाकर, इंटर्नशिप का दूसरा दिन अत्यंत जानकारीपूर्ण और कौशल-केंद्रित रहा, जिसने विद्यार्थियों के प्रायोगिक ज्ञान को मजबूत किया और ’’मिट्टी और जल विश्लेषण में उन्नत प्रयोगशाला तकनीकों’’ की समझ को बढ़ाया। डाॅ. तपेश चंद्र गुप्ता. प्राचार्य




