FOURTHPILLARSNEWS रायपुर। दिनांक 27.11.2025
शासकीय जे योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में आज “बहुविषयक विमर्शः भारत में लोकतंत्र के 75 वर्ष एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का विधिवत शुभारंभ हुआ। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय श्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद रायपुर लोकसभा द्वारा किया गया। उद्योगपति श्री विजय गोयल एवं कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि माननीय श्री बृज मोहन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन की शुरुआत “छत्तीसगढ़ महतारी” और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और समाज की आत्मा में गहराई से समाया हुआ मूल है। उन्होंने 75 वर्षों में भारत द्वारा हासिल की गई लोकतांत्रिक उपलब्धियों का उल्लेख किया और इसे “आत्मा की शक्ति और नागरिक जिम्मेदारी” के रूप में परिभाषित किया। श्री अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र के अमृत महोत्सव का आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक अवसर है जब हम अपने संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों को समझें और समाज में इनके प्रति जागरूकता फैलाएं।

उनका कहना था कि भारतीय ज्ञान दर्शन गीता, उपनिषद, वेद, रामायण और पुराण में मानव जीवन, नैतिकता, नेतृत्व और समाज निर्माण के ऐसे आदर्श निहित हैं, जो विश्व के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने प्राध्यापकों और शिक्षाविदों से अनुरोध किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा के इन मूल्यों को पाठ्यक्रमों में और अधिक शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में नैतिकता, सामाजिक चेतना और नेतृत्व कौशल विकसित हो। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारतीय ज्ञान और लोकतंत्र का संदेश विश्व स्तर पर फैलाना चाहिए।

श्री अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का स्वर्णिम इतिहास और सांस्कृतिक विरासत विश्व को दिशा देने वाली है और इसकी पहचान बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि वे सेमिनार में अपने विचार साझा करें, सीखें और भारतीय लोकतंत्र व ज्ञान प्रणाली के महत्व को हर स्तर पर समझें। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि इस आयोजन की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करें, ताकि भारतीय ज्ञान दर्शन और लोकतंत्र की पहचान न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी मजबूती से स्थापित हो सके।
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने अपने उद्बोधन में भारतीय शिक्षा व्यवस्था की प्राचीनता और वैदिक ज्ञान की वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों की लंबे इतिहास की परंपरा को रेखांकित किया।
सेमिनार का शुभारंभ सरस्वती पूजन-वंदना एवं राजगीत की प्रस्तुति से हुआ, जिसके पश्चात महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता, डॉ. विनीता अग्रवाल एवं अन्य सदस्यों द्वारा अतिथियों का पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया गया। प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन में सेमिनार की रूपरेखा एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सेमिनार में देश ही नहीं वरन मलेशिया, तुर्की, श्रीलंका, फिलीपींस, थाईलैंड सहित कई देशों के विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
आयोजन सचिव एवं विधि विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता अग्रवाल ने देश-विदेश के लगभग 350 प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए लोकतंत्र और भारतीय ज्ञान दर्शन को जीवन एवं शिक्षा में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तीन दिवसीय संगोष्ठी के दौरान अनुसंधान, संवाद और अनुभव-साझाकरण को प्रोत्साहित करने की बात कही तथा मीडिया प्रतिनिधियों से भारतीय ज्ञान परंपरा के संदेश को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुँचाने का अनुरोध किया। अंत में डॉ. अग्रवाल ने इस सेमिनार को महिला सशक्तिकरण, शिक्षा के महत्व और लोकतंत्र के सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रसार का माध्यम बताते हुए कहा कि इस मंच से निकले विचार और शोध देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में ऐसे संगोष्ठियों के निरंतर आयोजन का महत्व रेखांकित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने लोकतंत्र और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए तथा प्रतिभागियों को संगोष्ठी का पूर्ण शैक्षणिक लाभ लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को प्रतीक-चिह्न प्रदान किए गए तथा राजनीति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. कीर्तन साहू ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, आयोजन समिति, प्रतिभागियों, मीडिया कर्मियों तथा महाविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। उद्घाटन के बाद पहला तकनीकी सत्र हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम) में संपन्न हुआ।
इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. कोसगा राज, मलेशिया ने “21वीं सदी में बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से जटिलताओं को समझना, समग्र विकास को प्रोत्साहित करना और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा, समाज और पर्यावरण के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को समझकर ही समग्र और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
सत्र की अध्यक्षता डॉ. डी. के. पांडे, विभागाध्यक्ष वाणिज्य विभाग ने की।
उन्होंने सत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 21वीं सदी में वैश्विक स्तर पर विकसित और विकसित होते समाजों में जटिल समस्याओं का समाधान बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से ही संभव है। डॉ. पांडे ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में इस दृष्टिकोण को अपनाकर नवाचार और सतत विकास में योगदान दें। सत्र की मेजबानी डॉ. रचना मिश्रा, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग ने की।
उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सत्र न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि विभिन्न देशों और विषयों के विशेषज्ञों के अनुभव साझा करने का भी अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि हाइब्रिड मोड में आयोजित यह सत्र वैश्विक सहभागिता और विचारों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सत्र के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनीता जुनेजा, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस सत्र में साझा किए गए विचार, दृष्टिकोण और अनुभव प्रतिभागियों के लिए प्रेरणास्रोत होंगे और इसे आगे के शोध और शिक्षा में लागू किया जा सकता है।
आयोजन सचिव डॉ. विनीता अग्रवाल ने अगले दिन के कार्यक्रम और सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन विभिन्न विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बहु-विषयक सत्र आयोजित होंगे, जिसमें शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित शोध प्रस्तुत किए जाएंगे। डॉ. अग्रवाल ने उपस्थित प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे अगले दिन भी सक्रिय रूप से भाग लें, अपने विचार साझा करें और बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान करें।
अंत में प्राचार्य डाॅ.तपेश चन्द्र गुप्ता ने विभिन्न देशों के मुख्य वक्ताओं, देश के विभिन्न राज्यों यथा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात इत्यादि के प्रतिभागियों, आयोजन समिति के सदस्यों, अन्य कर्मचारीगण इत्यादि का धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम का मंच संचालन डाॅ.सुभद्रा राठौर, विभागाध्यक्ष (हिन्दी विभाग) के द्वारा किया गया




