महाकुंभ- शिवरात्रि पर प्रयागराज में जुलूस नहीं निकलेगा भीड़ कम होने से अब जाम नहीं

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शिवरात्रि पर शहर में 16 किमी लंबी शोभायात्रा निकलेगी

महाकुंभ में रविवार (आखिरी वीकेंड) को पूरे दिन भारी भीड़ रही। लेकिन, रात होते-होते भीड़ कम होने लगी है। लोगों ने प्रयागराज से निकलना शुरू कर दिया है। इसके चलते सुलेम सराय की रोड (कानपुर रोड) पर यातायात सामान्य है। जाम की कोई स्थिति नहीं है। इसी तरह अन्य इलाकों में जाम कम हो रहा है।

इससे पहले रविवार सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। इसका ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक वालों ने भी खूब फायदा उठाया। नाव वालों ने भी मनमाना पैसा वसूला। भास्कर रिपोर्टर ने मौज गिरी घाट से संगम तक नाव बुक करने की बात की तो नाविक ने 20 हजार रुपए मांगे। सामान्य दिनों में नाव बुक करने पर एक हजार रुपए लेते हैं।

सिविल लाइंस रेलवे स्टेशन के पास बाइकर्स गैंग पूरे दिन मौजूद रहा। इसने यात्रियों को मेला तक पहुंचाने के लिए महज दो किमी के 500 रुपए वसूले। इनके खिलाफ पुलिस ने जीटी जवाहर चौराहे पर अभियान चलाया और 200 से अधिक बाइकें सीज कर दीं। सड़क किनारे खड़े 50 वाहनों को हटवाया। 750 गाड़ियों का चालान किया।

शिवरात्रि पर शहर में 16 किमी लंबी शोभायात्रा निकलती है। कई मंदिरों से भी जुलूस निकाले जाते हैं। पुलिस के अधिकारियों ने कमेटी से बात कर शोभायात्रा न निकालने पर राजी कर लिया है। एयरपोर्ट पर भी चाय-कॉफी के लिए लाइन लगी रही। अंदर ज्यादा भीड़ होने से यात्रियों को बाहर पार्किंग की तरफ रोका गया। फ्लाइट आने के 3 घंटे पहले एंट्री दी गई। भीड़ के चलते ज्यादा से ज्यादा स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए रेलवे ने 67 ट्रेनें 1 मार्च तक के लिए रद्द कर दीं। कम दूरी की ज्यादा ट्रेनें चलाई जा रही हैं। पश्चिम बंगाल के 200 श्रद्धालु पहुंचे महाकुंभ

महाकुंभ में पश्चिम बंगाल से 200 श्रद्धालु पहुंचे। पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालुओं के जय श्री राम के उदघोष से पूरा महाकुंभनगर गूंज उठा। श्रद्धालु हर हर गंगे, बम बम भोले का जयकारा लगाते रहे। अभी महाकुंभ को लेकर टिप्पणी करने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान के उलट पश्चिम बंगाल की जनता में पवित्र त्रिवेणी स्नान को लेकर जबरदस्त उत्साह रहा

रविवार को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से 2000 श्रद्धालुओं का यह विशाल दल 40 बसों में सवार होकर संगम की पावन रेत पर एकत्र हुआ। इसी के साथ यहां श्रद्धालुओं ने प्रमुख संतों के साथ संगम में पवित्र स्नान भी किया। इसके बाद संतों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से राम नाम का जप भी किया।

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